Sunday, February 18, 2018

समाज

दर्पण

कर दो अमर इस सयोंग को आँखों की भीगी फ्रिक्वेंसी पर सवार वह तस्वीर लोकतंत्र की चेतना पर व्यवस्था की आत्मा पर संसदिये संवेदना पर सवालिया निशान है पत्नी का...

याद नहीं है

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