काउन्सलिंग में उज्जवल भविष्य

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यह भाग दौड़ भरा दिन, सुबह आँख खुलने से लेकर रात घर लौटने तक रोज़ की एक ही दिनचर्या| वैश्वीकरण के दौर में एक तरफ एक दुसरे से प्रतिस्पर्धा की जंग तो दूसरी ओर उस प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए काम का दबाव इन्सान को बीमार बनाने के लिए काफी है| यह ऐसी बीमारी नहीं जो कोई दावा लेने से ठीक हो जाए बल्कि यह वह मनोवैज्ञानिक समस्या है जिससे आज बड़े बड़े प्रगतिशील देश झेल रहे हैं| अमरीका जैसे देश में हर 5 में से 1 व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी का शिकार है| भारत देश में यह आंकड़ा लगभग 60 लाख के ऊपर है| चिंताजनक बात यह है कि यह आंकडे बढ़ते जा रहे है जिसका मुख्य कारण हमारी बदलती दिनचर्या और हमारे आचरण में बदलाव है| सुबह से लेकर रात और अगले दिन से फिर वही दिनचर्या, खानपान में बदलाव, फ़ास्ट फ़ूड कल्चर ने आज से 50 वर्ष पूर्व के इंसान में बहुत नकारात्मक बदलाव कर दिए हैं| यह बदलाव स्वास्थ्य के साथ साथ मनोवैज्ञानिक स्तर के भी पाए जाते हैं|

इन मनोवैज्ञानिक बीमारी के इलाज के लिए आज देश में मनोचिकित्सक भी उपलब्ध नहीं जितने की आज हमको आवश्यकता है| दिसंबर 2015 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रव्यापी 3,800 मनोचिकित्सक, 898 नैदानिक मनोवैज्ञानिक, 850 मनोवैज्ञानिक सामाजिक कार्यकर्ता और 1,500 मनश्चिकित्सीय नर्स देशभर में मौजूद हैं।

मतलब यह की देश में कुल 1 लाख लोगों पर केवल 3 मनोचिकित्सक मौऊद हैं जो डब्ल्यूएचओ द्वारा राष्ट्रमंडल मानक के अनुसार 18 गुणा कम है, प्रति 100,000 लोगों में 5.6 मनोचिकित्सकों की उपस्थिति होना अनिवार्य है| इस अनुमान के अनुसार, भारत में 66,200 मनोचिकित्सकों की कमी है| इसी प्रकार, प्रति 100,000 लोगों पर 21.7 मनश्चिकित्सीय नर्स के वैश्विक औसत पर आधारित, भारत को 269,750 नर्सों की जरूरत है।

इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए हमको एक मज़बूत कार्य बल की ज़रुरत है जो हमारे नवयुवक बहुत ही अच्छे से अंजाम दे सकते हैं| काउंसलर या सलाहकार का काम एक मदद प्रदान करने का होता है जहाँ वह लोगों को मुश्किल हालात से निपटने में सहयोग प्रदान करते हैं| काउंसलर्स को सहायता प्रदान करने, परामर्श, तकनीकों और उपचारों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। वे ग्राहक को उनकी समस्या से निपटने में मदद करते हैं।

काउन्सलिंग के क्षेत्र में कार्य करने के लिए छात्रों को 12वीं में विज्ञान, वाणिज्य, मानविकी / कला के साथ अनिवार्य में मनोविज्ञान विषय लेना आवश्यक है|

शैक्षणिक कठिनाई: मध्यम

नौकरी/जॉब प्रोफ़ाइल
काउंसलर्स किसी भी प्रकार की समस्या से निपटने में लोगों की सहायता करते हैं
वह किसी नतीजे पर पहुँचने से पूर्व ध्यान से सुनते हैं|
वह ग्राहक को एक नतीजे पर आने के लिए उनकी भावनाओं और विचारों को खोजने और स्पष्ट करने में सहायता करते हैं।
वह कई स्थितियों में सहायता करते हैं – कैरियर की योजना बनाना, सामाजिक मुद्दों, भावनात्मक समस्याओं, वैवाहिक या माता-पिता के संकट, घरेलू हिंसा आदि समस्याओं से जूझ रहे ग्राहक को सहायता, परामर्श, तकनीक और चिकित्सा प्रदान करते हैं और उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करते हैं|
काउंसलर्स नशीले पदार्थों और शराब के व्यसन में काम कर सकते हैं|

रोजगार के अवसर
स्कूल काउंसिलिंग, करियर काउंसिलिंग प्रतिष्ठानों, पुनर्वास काउंसिलिंग, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, शैक्षणिक काउंसलिंगिंग संगठन, सामाजिक विकास एजेंसियां, कॉर्पोरेट एचआर डिवीजनों, सरकार या स्वयं रोजगार के अवसर मौजूद रहते हैं|

वहां कैसे पहुंचें?
बारहवीं के बाद मनोविज्ञान या समाजशास्त्र विषय में स्नातक पाठ्यक्रम| काउंसिलिंग एक स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम है इसलिए अधिक अच्छी तरह से प्रशिक्षित परामर्शदाताओं को स्नातकोत्तर पूरा करने की आवश्यकता है| स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के दौरान भी विशेषज्ञता प्राप्त की जा सकती है। स्नातकोत्तर विकल्प मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सामाजिक कार्य में हैं।

कहाँ अध्ययन करें?
कर्नाटक विश्वविद्यालय
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद
पंजाब विश्वविद्यालय
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, मैसूर
एसएनडीटी विश्वविद्यालय
मद्रास विश्वविद्यालय
शिक्षा रीजनल इंस्टिट्यूट

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