दिल्ली युनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में ए बी वी पी की क़रारी हार

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दिल्ली विश्वविद्यालय में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया(NSUI) ने अध्यक्ष पद समेत 2 पदों पर जीत दर्ज की है!
पिछले चार साल से DUSU पर आरएसएस के छात्र संगठन ABVP का क़ब्ज़ा था!
ABVP पर DUSU बजट में भ्र्ष्टाचार के भी आरोप लगे हैं ये बात ख़ूब प्रचारित हुई कि ABVP ने DUSU के कुल बजट में से 22 लाख रुपए सिर्फ़ चाय बिस्किट और फ़ोटो कॉपी पर ख़र्च कर दिए!
इस बार ABVP सिर्फ़ महासचिव और सह सचिव पद पर ही जीत दर्ज कर पाई!
NSUI के अध्यक्ष पद प्रत्याशी रॉकी तूसीद का नामांकन रद्द होने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे बहाल कर दिया था!
ये जीत ऐसे समय में बहुत मायने रखती है जब देश के शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रवाद पर तीखी बहसों का दौर जारी है!
ABVP की इस करारी हार से अर्थ निकलता है कि देश के युवा बेरोज़गारी से त्रस्त हैं!वो बांटने की राजनीति में विश्वास नहीं रखते!उन्हें देश के ज्वंलत मुद्दे महँगाई,बेरोज़गारी,और विकास से ही सरोकार है!
इस जीत के कई मायनों में से एक ये भी है कि देश के छात्र और युवा आरएसएस के हिंदुत्व के एजेंडे को नकारने का दम रखते हैं!वो संविधान के मूल्यों और इसकी धर्मनिपेक्षता के साथ खड़े हैं!
पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में ABVP के द्वारा की गई गुंडागर्दी से छात्र परेशान थे!इसी घटना का विरोध करके सुर्खियों में आई कारगिल शहीद की बेटी और दिल्ली विश्विद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा गुरमेहर कौर ने फेसबुक पर लिखा कि”अब मुझे लगता है कि में नार्थ कैंपस जा सकती हूं”

(खान इकबाल)

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