इन तीनों ने मिलकर आइन्स्टीन के काम को आगे बढ़ा दिया है

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इन्होने सयुक्त रूप से गुरुत्वाकर्षण तरंगो की सत्यता को सत्यापित किया. जिसकी अवधारणा पिछली सदी मे आइंस्टीन ने दी थी।  सालो रिसर्च करने के बाद चार बार धरती पर गुरुत्वाकर्षण तरंगो को पाया गया।  बीते वर्ष सितम्बर मे आखिरी बार इन तरंगो को देखा गया।

क्या होती है गुरुत्वाकर्षण तरंगे:

“यह तरंगे ब्रह्मांड मे होने वाली हिंसक और ऊर्जावान प्रक्रियाओ जैसे ब्लैक होल्स के टकराने या किन्ही दो बड़े पिण्डो के टकराने से उत्पन्न होती है”

1916 मे सर आइंस्टीन ने सापेक्षता के सिद्धांत मे बताया कि इलेक्ट्रो मेग्नेटिक (EM) तरंगो की तरह गुरुत्वाकर्षण तरंगे भी अस्तित्व मे होती है परन्तु वह इसका कोई प्रमाण नही दे पाए।  इस सिद्धांत के अनुसार ब्लैक होल्स की अनंत ग्रेविटी का कारण यह तरंगे होती है।  माना जाता है कि एक समय एेसा हो सकता है कि हमारा सौर मण्डल भी ब्लैक होल मे समा जाए हमारे सबसे पास ब्लेक हौल सुर्य से लाखो करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित है

यह हैं वर्ष 2017 भौतिकी का नोबल सम्मान हासिल करने वाले रेनर वईस, बैरी और किम थोर्ऩ   । और इन्होंने ही ऊपर लिखा कारनामा अंजाम दिया है । 

 

कौन है नोबल प्राइज विजेता :

LIGO लेब मे रिसर्च करने वाले थोर्न, रेनर व बैरी अमेरिकन वैज्ञानिक है जिन्होने अपने सहायको के साथ मिलकर इन लहरो पर अध्ययन किया तथा फरवरी 2017 मे इसे प्रतिपादित किया.

तारिक खान

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