क्यों भ्रष्टाचारियों को बचाना चाहती है राजस्थान सरकार?

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भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस पार्टी ने प्रदेश और देश में प्रचण्ड बहुमत के साथ सरकार बनायी थी आज वही भाजपा की सरकार राजस्थान में भ्रष्टाचारियों को बचाने वाला कानून बनाने जा रही है।
राजस्थान सरकार ने नेताओं, अफसरों और जजों को किसी भी अपराध से बचाने की पूरी तैयारी कर ली है। आने वाले विधानसभा सत्र में सरकार ऐसा बिल लाने जा रही है जिससे सांसदों, विधायकों, जजों और अफसरों के ख़िलाफ़ पुलिस या अदालत में शिकायत करना आसान नहीं होगा। इस बिल के विधानसभा में पारित होने के बाद सरकार की मंजूरी के बिना किसी भी लोक सेवक और जज के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं कराया जा सकेगा।
क्या कहता है अध्यादेश
इसके अनुसार किसी जज या पब्लिक सर्वेंट की किसी कार्रवाई या भ्रष्टाचार के खिलाफ, जो कि उसने अपनी ड्यूटी के दौरान की हो, उस पर अदालत के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते।  एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की अनुमति लेना जरूरी होगा। अगर सरकार 180 दिन तक इजाजत नहीं देती, तो 180 दिनों के बाद ही किसी  के खिलाफ कोर्ट के जरिए एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है । ऐसे लोक सेवक का नाम भी तब तक प्रेस की किसी रिपोर्ट में नहीं आ सकता जब त‍क कि सरकार इसकी इजाजत ना दे दे और अगर सरकारी मंजूरी से पहले किसी भी लोक सेवक का नाम किसी मीडिया में आता है तो उसके लिये 2 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
वैसे तो अब तक इस बारे में काफी कुछ मीडिया में आ चुका है और सबको ये पता लग गया है कि राजस्थान सरकार विधानसभा में अध्यादेश लाकर एक कानून बनाने जा रही है कि सरकार की अनुमति के बिना किसी भी लोक सेवक (सांसद, विधायक, सरकारी अधिकारी ), जज, मजिस्ट्रेट के विरुद्ध अनुसन्धान या FIR दर्ज़ नहीं हो सकेगी और ना ही कोई इस बारे में लिख सकेगा। इस अध्यादेश के विरोध को देखते हुए सरकार ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि इससे पहले महाराष्ट्र राज्य में भी इस तरह का कानून बन चुका है। सरकार की मंशा भ्रष्ट लोकसेवकों को बचाने की बिल्कुल भी नही है और सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
लेकिन ये अध्यादेश पहली नजर में ही ऐसा लगता है कि राजस्थान सरकार अपने गलत कारनामो को ढकने के लिए अब संवैधानिक व उच्चतम न्यायालय के घोषित कानून के विरुद्ध जाकर इस तरह के संशोधन लायी है की लोक सेवकों के अपराधों के विरुद्ध न कोई पुलिस FIR दर्ज़ कर सकती है,ना जांच कर सकेगी, न मजिस्ट्रेट अनुसन्धान आदेशित कर सकेगा न खुद कर पायेगा, जब तक सरकार आज्ञा नहीं देती, साथ ही इसके बारे में कोई लिख नहीं सकता, छाप नहीं सकता, जब तक आदेशित न हो। राजस्थान सरकार ने तो नेताओं, अफसरों और जजों को अपराध से खुली छूट देने की पूरी तैयारी कर ली है।
मौजूदा सरकार शायद ये भूल गयी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ही जनता ने केंद्र में और राज्य में भाजपा सरकार को प्रचंड बहुमत दिया था।

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