लड़कियां कहां सुरक्षित हो सकती हैं?

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जब मुझसे पूछा गया की मेरे लिए स्वतंत्रता का क्या मतलब है? मैनें जवाब दिया की मैं जब चाहूं, जहां चाहूं बिना किसी डर के जा सकूं। हमारे देश में जब लड़कियां प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में ही सुरक्षित नहीं है तब वो कहां सुरक्षित हो सकती है? क्या हम विश्वविद्यालय के छात्रों से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद कर सकते हैं?

बीएचयू में 21 तरीख को विश्वविद्यालय की एक छात्रा के साथ विश्वविद्यालय के ही दो छात्रों ने छेड़छाड़ की। छात्रा ने घटना के बाद होस्टल वार्ड़न, गार्ड, चीफ प्रोकटर से शिकायत की, इसके बाद भी कोई एक्शन नही लिया गया। इसके विपरीत होस्टल वार्डन छात्रा को ही समझा रही थी के रात में होस्टल के बाहर क्यों गई? लेकिन किसी ने भी छात्रों को पकड़ने की कोशिश नहीं की। क्या इस बार भी लड़की की ही गलती थी? हर बार लड़कियों को ही क्यों दबाया जाता है? एक लड़की जिसका शोषण हुआ है लोगों को उसका साथ देना चाहिए न की इस तरह का व्यवहार करना चाहिए।

जब गुस्साई छात्राओं ने अपनी सुरक्षा की मांग करते हुए धरना प्रदर्शन किया तब भारी मात्रा में तैनात पुलिस ने छात्राओं पर लाठी चार्ज कर दी और पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। जिसमें कई छात्र छात्राएं घायल हो गए। एक तरफ तो आप बात करते हो महिला सशक्तिकरण की और दूसरी तरफ़ जब वो अपने हक के लिए लड़ रही हैं तब आप उन पर लाठी चार्ज कर देते हो। ऐसे हालात में कौन माता-पिता अपनी बेटियों को बाहर भेज पाएंगे?

इस घटना से पहले भी छात्राएं छेड़छाड़, यौन शोषण आदि से परेशान थी। जिसके चलते उन्होंने चीफ प्रोक्टर को एक शिकायत पत्र लिखा था, छात्राओं की मांग थी- आरक्षी की तैनाती पूरी रात की जाए, छात्रावास क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश हो और सीसीटीवी कैमरे लगवाएं जाएं। लेकिन छात्राओं की समस्याओं पर गौर नहीं किया गया और यह घटना हो गई। शायद प्रशासन इस इंतज़ार में है की किसी छात्रा के साथ कोई अनाहोनी हो तब वो कुछ करेंगे।

इस घटना से जहां पूरा देश हिल गया वहां विश्वविद्यालय के कुलपति को फ़ुर्सत नहीं मिली के वो छात्राओं से मिले उनकी समस्यांए जाने। बहुत ही हैरानी की बात है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस में होते हुए भी उनकी समस्यांए जानने के लिए नहीं गए।

इससे भी ज़्यादा बुरी बात यह हुई के अन्य पार्टियों के नेता विश्वविद्यालय पहुंच गए और इस पूरे संघर्ष को राजनीतिक दाव पेंच में उलझा दिया। अब अगर छात्रा को न्याय मिल भी जाता है तब भी विश्वविद्यालय की साख पर दाग तो लग ही गया। एक बार फ़िर प्रशासन विफल हो गया भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फ़िर प्रश्न चिंह लग गया।

महिमा सिंह
सीएमएस विभाग
केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान

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