साझा संस्कृति का विकास उत्तर भारत मे नहीं हो सका, दक्षिण मे हुआ : प्रो सुलेमान सिद्दीकी

उस्मानिया विश्वविधालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सुलेमान सिद्दीकी ने कहा कि " मुसलमानों का भारत मे आगमन मोहम्मद बिन कासिम के साथ नहीं था बल्कि इससे पूर्व ही पैगंबर मुहम्मद सल्ल. के समय केरल में आये और यहां व्यापार शुरु किया।

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उस्मानिया विश्वविधालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सुलेमान सिद्दीकी

हैदराबाद: सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (CERT) द्वारा आयोजित हो रहे दक्षिण भारत इतिहास सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न इतिहासकारों, प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। ज्ञात रहे कि शिखर सम्मेलन का ये आयोजन सीईआरटी (सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) ,स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) के सहयोग से कर रही है । इसका उद्देश्य ऐतिहासिक दृष्टिकोण को जानना और हाशिए पर मौजूद समुदायों के मुद्दों पर विचार विमर्श करना था ।
अपने आरंभिक भाषण में SIO के राष्ट्रीय अध्यक्ष लबीद शाफी ने सम्मेलन के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “भारतीय इतिहास को व्यवस्थित तरीके से बदला जा रहा है । दक्षिण भारत का इतिहास और संस्कृतियां अन्य भारत से विविधतापूर्ण हैं । ऐसी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद, सीईआरटी ने इस महत्वपूर्ण विषय पर समय की आवश्यकता को देखते हुए कार्यक्रम आयोजित किया है ।”
उस्मानिया विश्वविधालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सुलेमान सिद्दीकी ने कहा कि ” मुसलमानों का भारत मे आगमन मोहम्मद बिन कासिम के साथ नहीं था बल्कि इससे पूर्व ही पैगंबर मुहम्मद सल्ल. के समय केरल में आये और यहां व्यापार शुरु किया। उन्होने कहा कि उत्तर और दक्षिण के बीच का अंतर यह है कि दक्षिण में हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे के साथ शांति से रहते थे। यहां तक कि दक्षिण के हिंदू राजाओं ने व्यापार के लिए मुसलमानों को कई अवसर प्रदान किए । जबकि उत्तर भारत में, हमेशा एक विवाद की स्थिति रही है । इस पूरे क्षेत्र में सत्ता के लिए हमेशा विभिन्न राजाओं मे युद्ध चलते रहे । इस बीच एक ऐसा था युद्ध जिसमें मोहम्मद बिन कासिम ने भी मौका पाकर भारत पर आक्रमण कर दिया । ” प्रोफेसर सुलेमान के अनुसार ये तथ्य गलत है कि साझा संस्कृति उत्तर में विकसित हुई जबकि इसका केन्द्र दक्षिण रहा है । दक्षिण भारत मे मुस्लिमों के इतिहास की वापसी 1300 ईस्वी में हुई जब निज़ामों ने कई मंदिरों, मस्जिदों और विश्वविद्यालयों में लाखों रुपये की आर्थिक सहायता दी ।
इस दौरान उद्घाटन सत्र के बाद अन्य विषयों पर तीन और सत्र आयोजित हुए जिनके विषय क्रमश: दक्षिण भारत के समुदायों का इतिहास, दक्षिण भारत में विभिन्न विलयों का इतिहास, भारत के इतिहास मे कमियों की अलोचना।
इन सभी सत्रों को कोम्बाई एस अनवर (वरिष्ठ पत्रकार और डॉक्युमेंट्री निर्माता), सरफराज शेख (वरिष्ठ पत्रकार, टाइम्स ऑफ इंडिया) और डॉ मुजफ्फर असदी (रायचूर विश्वविद्यालय) ने चेयर किया । आखिर मे एसआईओ के राष्ट्रीय महासचिव सैयद अजहरूद्दीन की अध्यक्षता में राज्य आधिपत्य और विनियोग विषय पर गोलमेज सत्र का भी आयोजन किया गया ।
कार्यक्रम मे कई छात्र संगठनों तथा विश्वविद्यालय छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया । इस दौरान दक्षिण भारत के 7 अलग-अलग राज्यों से आये इतिहास के शोधार्थियों ने इस दो दिवसीय दक्षिण भारत इतिहास सम्मेलन में भाग लिया ।

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