दिल्ली दंगा : 32 साल साथ रहे,लेकिन उस दिन सब खत्म हो गया

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“32 साल से शिव विहार में रह रहे हैं,कभी महसूस नही हुआ कि आज जब घर छोड़ आए हैं तो वापस उस इलाके में जाने तक का मन नही होगा। हम पड़ोसी हिंदुओं के घरों में आते जाते थे,दुकान के बाहर बेठकर गप्पे लड़ाना,साथ चाय पीना, बच्चों की दोस्ती,सबकुछ था,बस अचानक वो दोपहर आई और सब खत्म हो गया,अब उस इलाके में जाने का मन नही करता” इतना कहकर 45 वर्षीय रूबीना का गला रूंध गया और आंखों से आंसू टपकने लगे”

रुबीना बानों से हमारी मुलाकात मुस्तफाबाद में स्थित अल हिन्द हॉस्पिटल में बने रिलीफ कैम्प में हुई। “रुबीना ने बताया कि उनके परिवार के साथ हर पड़ोसी के अच्छे सम्बन्ध थे,शादी ब्याह में आना जाना,एक दूसरे के त्योहार मनाना और एक साथ मिलजुल कर रहा जाता था लेकिन उस दिन जय श्री राम के नारे लगाती हुई एक भीड़ आयी और हमारी ज़िंदगी का मतलब बदलकर चली गयी,हमारा पूरा परिवार दिनभर घर के एक कोने में दुबका रहा,नीचे हमारी सिलाई की दुकानें थी जहां तोड़ फोड़ की गई,सबकुछ खत्म कर दिया गया,अगले दिन हम अपना घर छोड़ आए।

उसी इलाके में रहने वाली पाकीज़ा बताती हैं “कि उस दिन के ख़ौफ़ को शब्दों में बयान नही किया जा सकता,हम दिनभर इसी भरोसे रहे की पुलिस आ जाएगी तो सब ठीक हो जाएगा लेकिन ये हुड़दंग बढ़ता ही रहा,हमने अपनी जान बचाने के लिए कपड़े तक बदल लिए,बिंदिया लगाकर घर से निकले ताकि हमारी पहचान ना हो सके और हम बच जाएं”

80 वर्षीय दादी हसीना कहती हैं कि पूरी ज़िंदगी में ऐसा कभी नही देखा,हमें अपने पैसों गहनों से मतलब नही है,हम अपने बच्चों की जान जाते नही देख सकते, वो हमारा सारा पैसा लूट कर ले गए लेकिन हमारे बच गए हैं यही हमारे लिए सबकुछ है,एक दिन इंसाफ होगा और इन सबका बुरा हाल होगा”

जब हमने रुबीना बानों से सीएए को लेकर चल रहे विरोध को वजह बताए जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि ” क्या विरोध दर्ज कराना हमारा अधिकार नही है ? कैसा प्यारा देश था हमारा जिसका क्या हाल कर दिया है इन लोगों ने,हम अपने हक अधिकार की लड़ाई को तो लड़ेंगे ही,हम प्यार मुहब्बत से रहना चाहते हैं और इन लोगों को लगता है कि हम डर गए हैं तो ऐसा बिल्कुल नही है,मौत ज़िंदगी तो परवरदिगार के हाथ में है,मरना सबको है,एक दिन ये खुद भी मर जाएंगे”

अल हिन्द होस्पिटल में हमारी मुलाकात ऐसे ही कई अन्य लोगों से हुई जिनका सबकुछ खत्म हो गया है लेकिन हिम्मत अभी भी बाकि है,ऐसे लोगों की मदद के लिए कई सामाजिक संगठन और छात्र समूह सामने आए हैं,आप भी ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आइए।

ग्राउंड रिपार्ट: छात्र विमर्श

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