विश्व पर्यावरण दिवस: सभी को उठानी होगी पर्यावरण बचाने की ज़िम्मेदारी

बढ़ते औद्योगिकीकरण और आधुनिकता की चकाचौंध ने हमारी जीवन-शैली को काफ़ी बदल दिया है। मानव जीवन में हो रहे निरंतर बदलावों ने पर्यावरण को भी प्रभावित किया है। मानव जीवन हेतु आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन किया गया है, इसीलिए आज पूरी दुनिया के सामने पर्यावरण संकट पैदा हो गया है।

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विश्व पर्यावरण दिवस: सभी को उठानी होगी पर्यावरण बचाने की ज़िम्मेदारी

मंज़र आलम, मासूम अली

पर्यावरण के प्रति जागरुकता फैलाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 5 जून को पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष पर्यावरण दिवस थीम प्रकृति के संरक्षण, संवर्द्धन के लिए अलग-अलग निर्धारित की जाती है। साल 2023 में विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘Solutions to Plastic Pollution’ थी। ये थीम प्लास्टिक प्रदूषण के समाधान पर आधारित थी। वहीं इस साल 2024 की थीम ‘Land Restoration, Desertification And Drought Resilience’ है। इस थीम का मतलब भूमि पुनर्स्थापन, मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने की क्षमता है।

विश्व में पर्यावरण प्रदूषण की समस्‍या जब विकराल रूप इख़्तियार करने लगी और संसाधनों के असंतुलित वितरण के कारण सभी देशों पर इसका बुरा असर पड़ने लगा तो इन समस्याओं से निपटने के लिए एक वैश्विक मंच तैयार किया गया। इस दिवस को मनाने का उद्धेश्‍य पर्यावरण की समस्‍याओं को मानवीय चेहरा देने के साथ ही लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना था, साथ ही विभिन्न देशों, उद्योगों, संस्थाओं और व्यक्तियों की साझेदारी को बढ़ावा देना था ताकि सभी देश, समुदाय व पीढ़ियां सुरक्षित तथा उत्पादनशील पर्यावरण का आनंद ले सकें।

विश्व पर्यावरण दिवस पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 1972 में पर्यावरण में होने वाले प्रदूषण पर स्टॉकहोम (स्वीडन) में दुनिया भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया था। इस सम्मेलन में दुनिया के 119 देशों ने भाग लिया था। सभी ने ‘एक धरती’ के सिद्धांत को मान्‍यता देते हुए हस्‍ताक्षर किए। इसके बाद से 5 जून को सभी देशों में विश्‍व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा। भारत में भी 19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ।

बढ़ते औद्योगिकीकरण और आधुनिकता की चकाचौंध ने हमारी जीवन-शैली को काफ़ी बदल दिया है। मानव जीवन में हो रहे निरंतर बदलावों ने पर्यावरण को भी प्रभावित किया है। मानव जीवन हेतु आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों का दोहन किया गया। इससे न सिर्फ़ ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पेड़ों का विनाश हुआ अपितु जीव-जंतुओं के आश्रय स्थल भी बर्बाद हुए। जलीय जीवों के साथ भी मानव का व्यवहार कुछ अच्छा नहीं रहा। प्लास्टिक की बोतलें, कचरे और अपशिष्ट पदार्थों को नदियों और तालाबों में बहाया गया जिससे जलीय जीवों को काफ़ी नुक़सान हुआ। ईश्वर ने किसी भी जीव-जंतु या पेड़-पौधे को यूं ही पैदा नहीं किया है ब्लकि मानव जीवन में उसका भी महत्वपूर्ण योगदान है। हम प्रकृति से जितना दूर होते गए समस्याएं उतनी ही क़रीब आती गईं।

हमारे देश भारत में प्रकृति की पूजा की जाती रही हैं। कई धर्मों में पेड़ों की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में पूजे जाने वाले पीपल का वृक्ष ऑक्सीजन का भंडार है। इस्लाम में भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति विशेष ज़ोर दिया गया है। निःसंदेह पर्यावरण संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण कार्य वृक्षों, बाग़ों और जंगलों का संरक्षण है। इस्लाम पेड़ लगाने और उनका संरक्षण करने पर बहुत बल देता है। क़ुरआन में ‘वृक्ष’ शब्द 26 बार और स्वर्ग का बाग़ के रूप में वर्णन 146 बार आया है।

पवित्र क़ुरआन के अनुसार, थल और जल में बिगाड़ पैदा हो गया है लोगों के अपने हाथों की कमाई से!

“और वही (अल्लाह) है जिसने आकाश से पानी बरसाया, फिर उसके द्वारा हर प्रकार की वनस्पति उगाई, फिर उससे हरे-भरे खेत और वृक्ष पैदा किये, फिर उनसे एक के ऊपर एक चढ़े हुए दाने निकाले और खजूर के गाभों से फलों के गुच्छे पैदा किये, जो बोझ के कारण झुके जाते हैं और अंगूर, ज़ैतून और अनार के बाग़ लगाए, जिनके फल एक दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं और हरेक की विशेषताएं भिन्न भी हैं। ये पेड़ जब फलते हैं तो इनमें फल आने और उनके पकने की प्रक्रिया को तनिक ध्यान-पूर्वक देखो, इन चीज़ों में निशानियां हैं उन लोगों के लिये जो ईमान लाते हैं (ईश्वर में विश्वास करते हैं।)” पवित्र क़ुरआन – 6:99

पर्यावरण संरक्षण के लिए ज़्यादा से ज़्यादा वृक्षारोपण

वृक्षारोपण के द्वारा ही हम पर्यावरण को बचा सकते हैं। पेड़ हमें कई तरह से लाभान्वित करते हैं। जीवनदायिनी गैस ऑक्सीजन प्रदान करने के अलावा फल, फूल, सब्ज़ियां, लकड़ियां, उपस्कर, जड़ी-बूटियों से लेकर हमारे लिए उपयोगी जीव-जंतुओं के भोजन और आश्रय सारी चीज़ें जंगलों से प्राप्त होती है। इसीलिए हमें वृक्षारोपण के लिए अवसरों को तलाशने की ज़रूरत नहीं है। हां! किसी विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए वृक्षारोपण एक बेहतर तरीक़ा हो सकता है। जो वृक्ष हम आज लगा रहे हैं, ज़रूरी नहीं कि उसका फल हमें मिल ही जाए लेकिन यह आने वाली पीढ़ियों को अवश्य ही लाभान्वित करेगा।

जगत गुरू हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) ने फ़रमाया, “यदि तुम देखो कि क़यामत (महाप्रलय) आ गई है और तुम्हारे हाथ में एक पौधा है, तो उसे अवश्य ही लगा दो।” वृक्षारोपण करने वालों को प्रोत्साहित करते हुए फ़रमाया कि, “अगर कोई व्यक्ति पौधा लगाता है और इंसान या जानवर उसमें से खाता है तो उसे उसका बदला मिलेगा जैसे उसने दान में बहुत कुछ दिया हो।”

वनों की अंधाधुंध कटाई से हमारी ज़मीनें उसर-बंजर हो रही हैं जिससे उपजाऊ भूमि का संकट उत्पन्न हो रहा है। ईश्वर के अंतिम संदेष्टा हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) ने शुभ सूचना देते हुए फ़रमाया, “जो कोई किसी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाता है, फिर उसमें खेती करता है तो ईश्वर उसे पुरस्कृत करेगा और जब तक मनुष्य और जानवर उसमें से खाते रहेंगे, उसे दान देने का पुण्य मिलता रहेगा।”

इस्लामी शासनकाल में सेनाओं को स्पष्ट निर्देश दिए जाते थे कि जब वे किसी बस्ती में प्रवेश करें तो वहां पानी के स्रोतों को गंदा न करें, हरे पेड़ नष्ट न करें और खेतियों को बर्बाद न करें।

वृक्षारोपण हर दौर की आवश्यकता है। अतः हर व्यक्ति को जीवन में कम-से-कम एक पेड़ तो लगाना ही चाहिये ताकि हमें पर्यावरण असंतुलन से गुज़रना न पड़े। आज हम सभी बढ़ती गर्मी को लेकर परेशान हैं। पहले की अपेक्षा इस वर्ष कुछ ज़्यादा ही गर्मी पड़ रही है। तापमान लगतार 42 डिग्री से ऊपर रह रहा है। यह सब कहीं-न-कहीं धरती पर बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही हो रहा है। आज विकास के नाम पर वनों को काटा जा रहा है। कुछ औद्योगिक उत्पादनों के लिए वनों का भी निर्ममता से विनाश किया जा रहा है। इससे पर्यावरण पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। पर्यावरण प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पर्यावरण के तीन मुख्य घटक जल, वायु और पौधे लगातार दोहन का शिकार हो रहे हैं।

पर्यावरण में वायु प्रदूषण का प्रथम कारण वनों की कटाई है। इसका कारण भवनों का निर्माण और औद्योगिक संस्थानों की स्थापना है। वायु में प्रदूषक तत्वों की मात्रा निरंतर बढ़ती जा रही है। बढ़ते वाहन और उनसे निकलने वाली गैस मानव जीवन में विष घोल रही हैं। औद्योगिक कचरे का अब तक कोई वैज्ञानिक हल नहीं निकल पाया है। ऐसे तो सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई योजनाएं चला रखीं हैं। लेकिन सही से निगरानी न हो पाने से उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

अगर हमें स्वस्थ्य जीवन चाहिए तो पर्यावरण को हर हाल में स्वच्छ रखना होगा। हमें पर्यावरण का संरक्षण करना होगा। पर्यावरण संरक्षण से तात्पर्य पर्यावरण की सुरक्षा करना है। वृक्ष-वनस्पतियों का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व है। वे मनुष्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वे मानव जीवन का आधार हैं। इसलिए धरती पर जितने वृक्ष कटते हैं, उतने लगने भी चाहिए, परन्तु ऐसा नहीं हो रहा है और इनकी संख्या लगातार घटती जा रही है जिसके परिणामस्वरूप अनेकों समस्याएं हमारे सामने आ रही हैं।

वातावरण स्वच्छ होगा, तभी हम सब स्वस्थ्य रह सकते हैं। वातावरण स्वच्छता का सीधा नाता पेड़-पौधों से है। हम सभी को मिलजुल कर पेड़-पौधे लगाकर अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संसाधनों की सौग़ात देनी होगी। हम सब जानते हैं कि वृक्ष कार्बन-डाई-ऑक्साइड लेते हैं और इसके बदले में ऑक्सीजन छोड़ते हैं। यह ऑक्सीजन हमारी प्राणवायु है। प्रकृति जल, जंगल और ज़मीन के बिना अधूरी है। हमें पौधे लगाने के साथ-साथ इनकी देखभाल की ज़िम्मेदारी भी लेनी चाहिए। धरती पर मानव जीवन को बचाने और सृष्टि के संरक्षण के लिए हमें ज़्यादा से ज़्यादा पौधे लगाने चाहिए। ऐसे में हर व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझना होगा।

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