नया क़ानून, सोशल मीडिया और मुसलमान

सोशल मीडिया के ज़रिये अब ऐसा खेल हो सकता है कि किसी इलाक़े में पहले मुसलमानों को भड़काया जाए, और उनमें सरकारी कोशिशों के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा भर दिया या उन्हें डरा दिया जाए कि वे ऐसी ग़लती कर बैठें जो कि उनके लिए ठीक न हो और उन्हें बदनाम करने मददगार हो।

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-अब्दुल रशीद अगवान

ओर्डीनेंस के ज़रिये एक नया क़ानून देश में लागू हुआ है। इस क़ानून में कोरोना के काम में लगे अमले यानी हेल्थकेयर से जुड़े डाक्टर, नर्स या दूसरे मुलाज़मीन, पुलिस और सफाई के काम से जुड़े लोगों से झगड़ा करने वाले लोगों को सात साल तक की सज़ा हो सकती है और उनसे पांच लाख रुपये तक का जुर्माना वसूल किया जा सकता है। ऐसे तमाम अपराध ग़ैर ज़मानती होंगे। इसमें कोविड-19 के मरीज़ों को ले जाने और क्वारेंटाइन करने का काम, लाॅकडाउन की पाबंदी कराने और किसी इलाक़े में हेल्थ सर्वे में रुकावट जैसी कोशिशें, इस काम में लगे लोगों पर हमला और इस बारे में सोशल मीडिया पर ग़लत ख़बर से लोगों को भड़काना शामिल होगा।

यह क़ानून इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि लाॅकडाउन के दौरान इस काम में लगे सरकारी अमले ख़ासतौर पर डाक्टरों और नर्सों पर हमले हुए। इंडियन मैडिकल ऐसोसिएशन के ऐहतिजाज के बाद यह क़ानून लाया गया है। पिछले दिनों हुए ऐसे हमलों में जहां दूसरे लोग भी पेशपेश रहे, कई जगह मुसलमानों ने भी कुछ इलाक़ों में उनको काम से रोका और उन पर हमला भी किया। इस क़ानून के लागू होने के बाद ऐसा करने वाले मुश्किल में फंस सकते हैं।

सोशल मीडिया के ज़रिये अब ऐसा खेल हो सकता है कि किसी इलाक़े में पहले मुसलमानों को भड़काया जाए, और उनमें सरकारी कोशिशों के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा भर दिया या उन्हें डरा दिया जाए कि वे ऐसी ग़लती कर बैठें जो कि उनके लिए ठीक न हो और उन्हें बदनाम करने मददगार हो।

इसके लिए क्या होना चाहिये? यहां कुछ मशवरे दिये जा रहे हैं।

1. सबसे पहले महामारी और उसके नतीजों को लेकर जो तनाव है उसे कम किया जाए। लोगों को बताया जाए कि सरकार और दूसरे लोग अपना फर्ज़ निभा रहे हैं ताकि मुल्क से यह वबा ख़त्म हो। अगर कुछ ग़लतियां हैं तो उन्हें नज़र अंदाज़ किया जाए और उनके लिए सही तरीक़ा अपना कर सरकार पर दबाव पैदा किया जाए। मुमकिन हो तो कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ने वाले लोगों का अच्छा इस्तक़बाल किया जाए और अच्छा माहौल बनाया जाए।

2. “मुसलमानों के ख़िलाफ़ साज़िश” जैसी पोस्ट जो अमूमन बदनाम आईटी सेल बनाता है उन्हें सख़्ती से रोक दिया जाए कि वे आगे न बढ़ें। क्योंकि इसी तरह की पोस्ट आम लोगों में डर और ग़ुस्सा पैदा करती हैं। मुसलमानों के हमलों की झूठी पोस्ट से हिंदुओं को भड़काया जा सकता है। ऐसी पोस्ट पर हिंदू दोस्तों को समझाने की ज़रूरत है न कि उन्हें दुश्मन समझ कर एक राय बनाने की। हेल्थ सर्वे को एनपीआर बता कर डराया जा सकता है। दोनों अलग अलग हैं इसलिए उसमें रुकावट डालने की कोशिश को नाकाम किया जाए।

3. किसी इलाक़े में मरीज़ को इलाज के लिए ले जाया जाए तो सरकारी अमले या वालंटियर्स का साथ दें। वे लोगों के और उस इलाक़े के भले के लिए आएंगे। इस तरह की ख़बरों को हवा न दें कि इलाज के दौरान ठीक से इलाज नहीं होगा, खाना ढंग से नहीं मिलेगा, सहूलतें ठीक नहीं होगी, वग़ैरह। एक वबा से बचने के लिए अपनी और अपने लोगों की जान बचाना असल काम है न कि घर जैसा आराम पाना।

4. लाॅकडाउन में गली कूंचों में घूमने वालों और सड़क पर मजमा लगाने वालों को मक़ामी लोग रोकें क्योंकि ऐसे लोग ही न सिर्फ कोरोनावायरस फैलाने का काम कर सकते हैं बल्कि पुलिस और हेल्थ डिपार्टमेंट के लोगों से झगड़ा भी आमतौर पर ऐसे ही लोग करते हैं।

5. हर जगह कुछ संजीदा लोग सोशल मीडिया पर सरगरम रहें और ग़लत ख़बरों को रोकें, वायरल मेसेज की तहक़ीक़ करें और लोगों की रहनुमाई करें। ज़रूरत पड़ने पर पुलिस और प्रशासन के लोगों से बात करें। हर जगह मस्जिद कमेटी के लोग, एमएलए, पार्षद, सरपंच या मुस्लिम तंज़ीम के ज़िम्मेदारों के मशवरे से काम किया जाए।

6. अगर किसी सरकारी आदमी की कोई ग़लती देखें तो उस पर हमला करने या उससे झगड़ा करने के बजाए उसकी शिकायत उसके ऊपर के आफीसर से की जाए।

7. मीडिया या सोशल मीडिया पर कोई भड़काऊ रिपोर्ट हो तो उसके ख़िलाफ़ फौरन शिकायत दर्ज कराई जाए।

8. लोगों को बताएं कि महामारी के दौरान घर से बाहर न निकलना, एक दूसरे से दूरी बनाए रखना, मरीज़ को अलग-थलग करना, लाॅकडाउन पर अमल करना और घर में ही नमाज़ पढ़ना सुन्नत है और महामारी के दौरान इन सबके ख़िलाफ़ अमल इस्लाम के ख़िलाफ़ अमल है।

यह कठिन दौर है मगर जल्दी ही ख़त्म भी हो जाएगा। समझदारी से काम लेने की ज़रूरत है। फिरक़ापरस्तों को शिकस्त देने की ज़रूरत है जो कि ऐसी भयानक वबा के दौरान भी देश को तोड़ने में लगे हैं। मगर इसके लिए ज़रूरी है कि अपने अंदर के डर और नफरत को ख़त्म करें। पोजिटिव रहें, तनाव से आज़ाद रहें और अल्लाह पर भरोसा रखें।

 

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