हमारी इतिहास की समझ, वर्तमान की राजनीति पर आधारित नहीं होनी चाहिए : सआदतुल्लाह हुसैनी

नई दिल्ली में छात्र संगठन SIO ने किया दो दिवसीय हिस्ट्री सम्मिट का आयोजन

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29 सितम्बर को शुरू होने वाले ऑल इंडिया हिस्ट्री सम्मिट ने इतिहासकारों, एक्सपर्ट्स, प्रॉफ्रेसर्स और अकादमिक लोगों के विभिन्न विचारों को एक प्लेटफॉर्म पर ला दिया। ये सम्मिट सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग, सेंटर फॉर रिसर्च हैदराबाद और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

इस सम्मिट ने उपेक्षित समुदायों की विभिन्न समस्याओं को ऐतिहासिक परिपेक्ष में उजागर किया. नेहरू मेमोरियल म्यूजियम में हुए इस दो दिवसीय सम्मिट में पहले दिन देश भर से आए विचारकों ने अपने विचारों को खुल कर रखा जिनसे इतिहास संबंधित शोद्ध विद्यार्थियों को सहायता मिलेगी.

इस सम्मिट के समापन समारोह में  सेंटर फॉर रिसर्च के डायरेक्टर एवं जमात ए इस्लमी हिन्द के उपाध्यक्ष सय्यद  सआदतुल्लाह हुसैनी ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि हमारी इतिहास की समझ, वर्तमान की राजनीति पर आधारित नहीं होनी चाहिए. एवं समारोह में उपस्थित छात्रों व छात्राओं को इतिहास सम्बंधित विषयों पर शोद्ध करने के लिए उभारा.

SIO के अखिल भारत अध्यक्ष नहास माला ने अपने भाषण में कहा कि सेक्युलर, जातिवादी, मानववादी, गैर मानववादी, कट्टरपंथी, सांप्रदायिक जैसी बनी बनाई अवधारणाओं से परे होकर इतिहास लेखन की एक नई वैकल्पिक नीति की खोज अकादमिक दुनिया के लिए एक चैलेंजिंग टास्क है, जबकि हिंदुत्व ताकते अपना नया इतिहास लिखना चाहती हैं

प्रोफेसर कांचा इलैया ने अपने विषय “Casting Out Caste – राजनीति में दलित हस्तक्षेप” पर बोलते हुवे कहा कि जाति एक  हकीकत है जिस पर मुस्लिम विचारकों को भी चर्चा करनी चाहिए.  कांचा ने कहा कि मुसलमानों को हिंदुत्वा राजनीति का विरोध करना ज़रूरी है क्यूंकि उनके पास अपनी हड़प्पा सभ्यता की राष्ट्रवादी शुरुआत है। प्रोफेसर कांचा ने अपने भाषण के बीच ये भी कहा कि भारत एक ‘Baffalo Nation’ है, ‘Cow nation’ नहीं.

जे एन यू के प्रोफेसर नजफ़ हैदर ने कहा कि मुसलमानों को हिंदुओ  और उनकी संस्कृति पर गहरी शोद्घ करनी चाहिए, और मुस्लिम समुदाय के अंदर भी एक विशेष वर्ग शासन (Heirarchy) पाया जाता है. और कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ब्रिटिश राज की अपेक्षा मुगल राज में ज़्यादा समृद्ध थी.

AMU के प्रोफेसर इश्तियाक जिल्ली ने कहा कि भारत में मुगलों का शासन एक मुस्लिम शासन था इस्लामी नहीं।

इस हिस्ट्री सम्मिट में देश के 12 राज्यों और 30 विश्वविद्यालयों से छात्र छात्राएं आए थे, पहले दिन इस में 10 शोद्ध पत्र प्रस्तुत किए गए जिनकी अध्यक्षता प्रोफ्रेसर अय्यूब अली (Kakatiya University) ने की। दुसरे दिन इस सम्मिट के अंतिम सेशन में लगभग 15 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए जिनकी अध्यक्षता  डॉ. जावेद जफ़र ने की।

अंतिम सेशन में जर्मनी से आने वाले एक अतिथि Dr Dietrich Reetz ने भी संबोधित किया. SIO के मुख्य सचिव खलीक अहमद और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ्रेसर  ज़हीर हुसैन जाफरी भी बोले जबकि मुख्य भाषण सआदतुल्लाह हुसैनी ने दिया.

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