कोटा में बढ़ती हुई आत्महत्याओं का ज़िम्मेदार कौन?

आंकड़े देखें तो इस वर्ष जनवरी से लेकर अगस्त तक 24 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है। केवल अगस्त के महीने में ही 6 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। जबकि पिछले वर्ष इस तरह की 15 घटनाएं सामने आईं थीं।

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कोटा में बढ़ती हुई आत्महत्याओं का ज़िम्मेदार कौन?

मुहम्मद शोएब

शिक्षा नगरी कहलाने वाले कोटा शहर में कोचिंग इंडस्ट्री लगभग ढाई दशक पुरानी बताई जाती है। इंजीनियर और डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले छात्र-छात्राएं देश के हर कोने से यहां आते हैं और इन कोर्सेज़ में प्रवेश की तैयारी करते हैं। हर साल लगभग डेढ़ से दो लाख छात्र-छात्राएं कोटा का रुख़ करते हैं। कुछ के सपने साकार हो जाते हैं तो कुछ को मायूस होकर लौटना पड़ता है। कुछ छात्र-छात्राएं तो अपनी असफलता को स्वीकार कर आगे बढ़ जाते हैं लेकिन कुछ बच्चे अवसाद में आकर आत्महत्या जैसे क़दम भी उठा लेते हैं।

हाल ही में, बीते 28 अगस्त को, मात्र चार घंटे के अंदर ही कोटा में दो छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के मामले सामने आए हैं। इनमें, बिहार के रोहतास ज़िले से आने वाला 18 साल का आदर्श राज और महाराष्ट्र के लातूर का निवासी 16 साल का अविष्कार संभाजी कासले था। एक ने फांसी लगाकर और दूसरे ने छत से छलांग लगाकर जान दे दी। कोटा में आत्महत्याओं का सिलसिला कोई नया नहीं है। हर साल यहां आत्महत्या की की घटनाएं सामने आती है। फिर भी राज्य सरकार ने इस पर अब तक कोई ठोस क़दम नहीं उठाया है। जो नियम बनाए भी गए हैं, राज्य सरकार कोचिंग संस्थानों से उनका पालन करवाने में विफल रही है।

कोटा में आत्महत्याओं का सिलसिला पुराना है

इस वर्ष इन घटनाओं में एक असामान्य बढ़ोतरी देखी जा रही है। आंकड़े देखें तो इस वर्ष जनवरी से लेकर अगस्त तक 24 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है। केवल अगस्त के महीने में ही 6 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। जबकि पिछले वर्ष इस तरह की 15 घटनाएं सामने आईं थीं। आंकड़ों के मुताबिक़ कोटा में औसतन हर महीने तीन छात्र आत्महत्या करते हैं। कोटा पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2015 में 17, 2016 में 16, 2017 में 7, 2018 में 20 और 2019 में 8 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की थी। 2020 और 2021 में कोविड के दौरान आत्महत्या के मामलों में गिरावट देखी गई थी। 2020 में जहां 4 छात्रों की मौत हुई तो वहीं 2021 में आत्महत्या से एक भी मौत दर्ज नहीं की गई, क्योंकि लॉकडाउन के कारण छात्रों ने शहर छोड़ दिया था। 2022 में यह आंकड़ा फिर 15 पर पहुंच गया। पिछले दिसंबर में पेश किए गए डेटा के अनुसार, 87 प्रतिशत आत्महत्याएं छात्रों और 13 प्रतिशत आत्महत्याएं छात्राओं द्वारा की गई हैं।

दिनों-दिन मज़बूत हो रही है कोचिंग इंडस्ट्री

कोटा में कोचिंग इंडस्ट्री की कुल नेटवर्थ लगभग 5,000 करोड़ रुपये के क़रीब बताई जाती है। यहां लगभग 3,000 हॉस्टल, 1,800 मेस‌ और 25,000 पीजी कमरे हैं। पिछले साल, 64,610 रिक्तियों पर, 2.74 मिलियन छात्र-छात्राएं इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में बैठे थे, जिनमें से 2.6 मिलियन से अधिक असफल रहे। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में कोटा आने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में 35 से 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साल 2021-22 में यहां 1,15,000 छात्र-छात्राएं कोचिंग के लिए पहुंचे थे, तो वहीं 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 1,77,439 हो गई थी। साल 2023-24 में ये आंकड़ा 2,05000 तक पहुंच गया है।

क्या हैं आत्महत्या के पीछे के मूल कारण?

हालिया मामले में प्राथमिक जांच करने के बाद कोटा के पुलिस उप-अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बयान दिया है कि आत्महत्या करने वालों में से एक छात्र अविष्कार के पिछली बार हुए रूटीन टेस्ट में कम नंबर आए थे। इसी बात को लेकर वह तनाव में था। अधिकतर मामलों में यही बात निकलकर सामने आती है कि रूटीन टेस्ट में अपनी स्थिति को देखते हुए छात्र मायूस हो जाते हैं और इस तरह के क़दम उठा लेते हैं। कुछ छात्र-छात्राएं अपनी इच्छा के विपरीत केवल परिवार के दबाव के कारण भी पढ़ने पर मजबूर होते हैं और असफलता के साथ परिवार का सामना करने की क्षमता अपने अंदर न पाकर आत्महत्या जैसे क़दम उठा लेते हैं।

प्रशासन और राज्य सरकार ने क्या क़दम उठाए?

आत्महत्या का 22वां मामला सामने आने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में थोड़ी बहुत सक्रियता दिखाते हुए एक बयान जारी किया था। इसके कुछ दिनों बाद ही दो और घटनाएं सामने आने के बाद कोटा के ज़िला कलेक्टर ने कोचिंग सेंटरों में रूटीन टेस्ट कराने पर दो महीने के लिए रोक लगा दी है। इसी तरह सप्ताह में एक दिन फ़न-डे मनाकर मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित करने का आदेश दिया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक समीक्षा बैठक में आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कोचिंग संचालकों को भी फटकार लगाई है। साथ ही अधिकारियों को इन घटनाओं को रोकने के लिए एक कमेटी बनाकर 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद नीतिगत फ़ैसले लिए जाएंगे।

क्या कहते हैं छात्र संगठन?

छात्र संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (एसआईओ) राजस्थान के प्रदेश सचिव मुहम्मद इरफ़ान ने इन घटनाओं को सरकार, प्रशासन और कोचिंग संस्थानों की लापरवाही का नतीजा बताते हुए इस संबंध में कुछ विशेष क़दम उठाने के सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि, “सरकार को इन मामलों में गंभीरता बरतनी चाहिए। कोचिंग संस्थानों के मालिकों के दबाव से बाहर निकलकर नियमों का सख़्ती से पालन करवाना चाहिए और इस तरह की घटनाओं की जवाबदेही कोचिंग संस्थानों पर तय होनी चाहिए। विशेष रूप से फ़ीस की दरें भी निर्धारित करने की आवश्यकता है। हर कोचिंग संस्थान में मनोचिकित्सकों या परामर्शदाताओं की एक बड़ी टीम होनी चाहिए जो समय–समय पर छात्र–छात्राओं के साथ काउंसलिंग सेशन आयोजित करती रहे। कोचिंग संस्थानों को प्रवेश के वक़्त छात्र को जांचना चाहिए कि वे उस क्षेत्र के लिए सही हैं या नहीं! साथ ही अभिभावकों को भी काउंसलिंग के द्वारा समझाया जाना चाहिए ताकि वे बच्चों की इच्छा के विपरीत केवल पारिवारिक दबाव की वजह से उन्हें पढ़ाने पर मजबूर न हों। अगर विशेषज्ञों के सुझावों के मुताबिक़ नियम बनाकर सख़्ती से पालन हों, तो इन घटनाओं को रोका जा सकता है।”

1 COMMENT

  1. Suicide on the rise in coaching market city Kota,Very good written article by brother Mohammad shoab. Congratulations for written this burning issue.
    I suggest that sio should and to create a student counseling cell to curb the rising incidence of suicides by coaching students come forward to curb this social problem and in the interest of students
    and to create a student counseling cell point to curb the rising incidence of suicides by coaching students.

    Regards
    Mohammed ali
    [email protected]

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