अल्पसंख्यकों की उच्च शिक्षा से संबंधित समस्याओं पर ‘सरकार से सवाल’

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अल्पसंख्यकों की उच्च शिक्षा से संबंधित तीन मुख्य समस्याओं पर ‘सरकार से सवाल’ विषय पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली में एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
ये प्रेस कॉन्फ्रेंस सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन सिविल राइट्स एवं  एस आई ओ ऑफ इंडिया द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों हेतु एक साझा प्रयास थी।
जिसमें तीन मुख्य मुद्दों पर बातचीत हुई:
(ध्यानपूर्वक पढ़िए एस आई ओ ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी किये गए इस प्रेस नोट को)
JAMIA MILLIA ISLAMIA MINORITY STATUS
         दिल्ली हाई कोर्ट में सरकार ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक स्वरूप के बारे में जो विचार प्रस्तुत किया है, वह संविधान में निर्देशित अल्पसंख्यकों के अधिकारों का खुला उलंघन है और भारत के बहुलतावादी चरित्र पर भी सवाल खड़ा करता है। सरकार का ये विचार स्पष्ट ऐतिहासिक तथ्यों को नकारता है।
NCMEI ने स्पष्ट रूप से कहा “जामिया की स्थापना मुसलमानों की तरक्की के लिए की गई और हमेशा से जामिया की पहचान एक अल्पसंख्यक संस्थान (माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन) की रही है।
इसीलिए भारत के संविधान के आर्टिकल 30(1) में ये दर्ज किया गया। इसलिए हम मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए मुसलमानों को अपने संस्थान बनाने और उनकी व्यवस्था स्वयं देखने की मांग करते हैं, और इस मत का समर्थन भी करते हैं।
MAULANA AZAD NATIONAL FELLOWSHIP
आल इंडिया सर्वे ऑन एजुकेशन के अनुसार मुस्लिम स्टूडेंट्स की हॉयर एजुकेशन में भूमिका 4.9% है, जबकि पूरे देश में मुसलमान 14% हैं। हॉयर एजुकेशन में मुसलमानों की इतनी दयनीय स्थिति है, तथा टीचर्स का प्रतिशत भी इतना ही है। ऐसी स्तिथि में सरकार कुछ सकारात्मक पहल करने के बजाय अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली फेलोशिप (MANF) में बदलाव करती है। और अब MANF लेने के लिए UGC–NET की परीक्षा में सफल होना आवश्यक है। सरकार का ये निर्णय मुस्लिम छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्ति में रुकावट बनेगा।
हमारी मांग है कि सरकार शीघ्र ही नया नोटिफिकेशन लाकर अपने निर्णय को वापस ले और AISHE–2017 (जो मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन है) के अनुसार मुस्लिम स्टूडेंट्स के प्रतिनिधित्व को  सुनिश्चित करे।
EDUCATIONAL DEVELOPMENT OF MINORITY CONCENTRATED DISTRICTS
2001 की जनगणना के अनुसार पूर्व सरकारों ने 90 जिलों को Minority Concentrated Districts माना है। अभी हाल ही में नीति आयोग ने 20 अति पिछड़े जिलों के नामों की घोषणा की थी जिसमें 11 Minority Concentrated Districts हैं।
जिनके नाम नूंह(मेवात, हरियाणा), शरवस्ती(यूपी), बहराइच(यूपी), सिद्धार्थ नगर(यूपी), बलरामपुर(यूपी), अररिया(बिहार), साहेबगंज(झारखंड), कटीहार(बिहार), दारंग (असम), पूर्णिया(बिहार), गोलपारा (असम) हैं।
ये एक हकीकत है कि अल्पसंख्यकों में केवल मुसलमान ही हैं जो शिक्षा में पिछड़े हुवे है। 1986 की एजुकेशन पॉलिसी ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए मुस्लिमों को शिक्षा में अति पिछड़ा स्वीकार किया था, लेकिन 2016 की पॉलिसी में इस तरह की किसी दिशा निर्देश नहीं मिलते।
हमारी मांग है कि •Minority Concentrated Districts में केंद्रीय विद्यालय व नवोदय विद्यालय खोले जाएं।
•उर्दू, हिंदी, व अंग्रेजी के टीचर्स की पर्याप्त मात्रा में बहाली हो।
•मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय(MHRD) के तीन सेंटर्स जो उर्दू टीचर्स की तरक्की के लिए काम करते हैं वो पर्याप्त नहीं है इनकी मात्रा बढ़ाई जाए।
•Minority Concentrated Areas में केंद्रीय विद्यालय माडल स्कूल भी बनाए जाएं, जिनमें मुस्लिम छात्रों को 50% प्रतिशत आरक्षण दिया जाए और हर Minority Concentrated District में अल्पसंख्यक स्वरूप पर आधारित एक यूनिवर्सिटी भी स्थापित की जाए।

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