कि कोई न सर उठाके चले !

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की सक्रिय छात्रा ध्रुपदी नूर का रजिस्ट्रेशन रद्द

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तस्वीर में जो दिख रही हैं वो ध्रुपदी नूर हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया से सोशियोलोजी में पीएचडी कर रही है। हाल फिलहाल यानी पिछले दो ढाई सालो में, मैं जिन छात्रों से मिला हूँ उनमे से आप एक ऐसी शख़्सियत है जिनसे कोई प्रभावित हुए बिना नही रह सकता है। देश मे अगर कही भी ज़ुल्म हो रहा है तो आपका स्टैंड बिल्कुल क्लियर रहता है मज़लूम के हक़ में खड़ा होना। उसके लिए लिखना ,पेंटिंग बनाना, प्रोग्राम करवाना! इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में अगर कुछ चार छह आवाज़ है तो उनमें से आपका नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। विश्विद्यालय के युवा छात्र आने वाले दिनों में समाज को लीडरशिप देते है। और ज़ाहिर सी बात है कि अगर मुस्लिम बाहुल्य छात्रों में लीडरशिप निकेलगी तो वो मुस्लिम लीडरशिप भी हो सकती है। इसलिये छात्रसंघ के चुनाव भी नही कराये जाते है। छात्रसंघ न होने के बावजूद ये ही कुछ छात्र हर मुद्दे में बोलते नज़र आते है, चाहे नजीब का मामला हो या हालिया दिनों में गोरखपुर में बच्चों के मरने का मामला।
अब ताज़ा खबर सुनिए। शुक्रवार के दिन अचानक इनको जामिया प्रशासन की तरफ से एक चिट्ठी मिली। चिट्ठी में कहा गया है कि आप का एडमिशन कैंसिल कर दिया गया है। यानी अब आप यूनिवर्सिटी की छात्र नही रही। न कोई नोटिस, न कोई सस्पेंशन न कुछ ! सीधे ख़ुदा हाफिज़ का परवाना। वजह भी जान लीजिए जामिया के जो नए VC साहब है, उनको प्रमोशन चाहिए और जिसके लिए वो जामिया की रिवायत को उसके वक़ार, इज़्ज़त सब को बेचने को तैयार है। अक्सर उसके लिए मोदी के दरबार मे सजदा करने जाते है और आरएसएस के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के इन्द्रेश को बराबर हाज़री देते रहते है। लोगो का ये भी कहना है कि उनके आफिस में अक्सर संघी और मंच के लोग जमे रहते है। ये सब को मालूम है कि जब से नए VC आये है, जामिया संघियो का नया अड्डा बन ही गया है । रमज़ान में मालेगांव, अजमेर दरगाह और समझौता एक्सप्रेस आतंकी हमले के आरोपी को जामिया में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया। जिसमें दूसरे मेहमाने खुसूसी VC साहब थे। छात्रों के ज़ोरदार प्रदर्शन के कारण VC तो उस इफ्तार में नही आये लेकिन इन्द्रेश पुलिस के ज़ोर पर जमिया आए। अगले दिन छात्रों ने VC के आफिस का घेराव किया। आपको सब से माफी मांगनी चाहिए कि एक आतंक का आरोपी कैसे जमिया में घुस सकता है ? और इन दोनों बड़े प्रदर्शनों में ध्रुपदी सबसे आगे थी जिसका इनाम उनको शुक्रवार को एडमिशन कैंसिल कर के दे दिया गया है
VC साहब ! जमिया आप की सल्तनत नही है जो आप संघ परिवार को बेच रही हैं। जिसके बदले में गवर्नर या कुछ और बन जाएंगे। जमिया एक रिवायत है, एक विरासत है उन बुज़ुर्गो की जो जंगे आज़ादी में सब कुछ कुर्बान करने वाले थे। जमिया एक तहज़ीब का नाम है जो मुल्क में गंगा जमनी के नाम से जानी जाती है। अगर आप इसको जंगे आज़ादी के अंग्रेज़ो के मुखबिरों के निर्दश पर इस तरह आम छात्रों के मुस्तक़बिल के साथ खिलवाड़ करेंगे या इसको आरएसएस की शाखा में तब्दील कर देंगे तो इस वहमों गुमान से बाहर आ जाइए। और ध्रुपदी का एडमिशन रद्द करने का नोटिस वापस लीजिये। देश मे अभी कई संस्थाएं भी जिंदा है और लोग भी जिंदा है। ध्रुपदी आप की इस लड़ाई मे हम सब शामिल है। आपके साथ है। लड़ाई चाहे लंबी हो या छोटी पीछे नही हटेंगे!!!

नदीम खान

नोट : लेखक के विचारों से संपादक मण्डल का सहमत होना आवश्यक नहीं है।

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