200-300 रुपए कम करवाने की लड़ाई नही लड़े रहे हैं हम- जेएनयू

जेएनयू में गांव देहात से आने वाले छात्र पढ़ते हैं और वहां की सुंदरता ही यही है कि जेएनयू ने देश के हर हिस्से से किसानों,मजदूरों और गांव की गलियों से आने वाले गरीब छात्रों को अपने माहौल में बसाया है,लेकिन अचानक पढ़ते हुए छात्र पर प्रशासन की फीस बढ़ोतरी का ये बोझ थोड़ा अजीब है।

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आप देख ही रहे हैं पिछले कुछ दिनों से जेएनयू फिरसे विरोध की मशाल हाथ में लिए सड़कों पर है,ऐसा क्या है कि छात्रों को सेशन का आधा वक़्त विरोध में गुज़ार देना होता है ? और विशेषत जेएनयू के छात्रों को ? जेएनयू से आखिर किसे दिक्कत है ? या जेएनयू किसके लिए दिक्कत बनकर हर बार सामने आया है ? क्या सरकार को जेएनयू नही भाता ? अगर ऐसा है तो क्यों है इस सवाल का जवाब आपकी तलाश के लिए छोड़ दे रहा हूँ।

अब आते हैं मुद्दे पर,इस बार जेएनयू में जो मुद्दा गर्म है उसकी रूपरेखा थोड़ी अलग सी है,आम छात्रों से लेकर सभी छात्र संगठन एक स्वर में आवाज़ मिला रहे हैं,चाहे वामपंथी संगठन हो या बापसा-फ्रेटर्निटी या फिर एबीवीपी-एनएसयूआई,सब एक साथ विरोध में उतरे हैं।
कारण क्या है ये जानने के लिए हमें जेएनयू प्रशासन का ये गणित समझना होगा
असल में हुआ यूं है कि जेएनयू के नए नियमों के मुताबिक़ एक सीटर कमरे का मासिक किराया 20 रुपए से बढ़कर 600 रुपए होगा, दो लोगों के लिए कमरे का किराया 10 रुपए से बढ़कर 300 रुपए होगा.ऐसा ही और भी बहुत कुछ विचित्र फरमान।

जेएनयू में गांव देहात से आने वाले छात्र पढ़ते हैं और वहां की सुंदरता ही यही है कि जेएनयू ने देश के हर हिस्से से किसानों,मजदूरों और गांव की गलियों से आने वाले गरीब छात्रों को अपने माहौल में बसाया है,लेकिन अचानक पढ़ते हुए छात्र पर प्रशासन की फीस बढ़ोतरी का ये बोझ थोड़ा अजीब है।

इस आदेश के बाद जेएनयू का आम छात्र इकट्ठा होने लगा और एक बड़ी संख्या में विरोध दर्ज कराए गए,जब सरकार को महसूस हुआ की बात हद से बाहर जा रही है तब
इस फीस बढ़ोतरी में बदलाव हुआ और इसे क्रमश: 300 और 150 रुपए कर दिया गया. सरकार ने इसे ‘मेजर रोलबैक’ यानी ‘भारी कटौती’ के तौर पर पेश किया.

जेएनयू के छात्र साफ शब्दों में कहते हैं कि हम शिक्षा को बेचने वाली ताकत के खिलाफ खड़े हैं,आपके 200 रुपए कम कर देने से शिक्षा बिक जाने से नही रुकेगी,हम चाहते हैं कि पूरा आदेश वापस लिया जाए”

जेएनयू छात्र संघ का कहना है कि
“मेजर रोलबैक” एक लॉलीपॉप की तरह है” और हम अभी भी हमारी मांगों के साथ टिके हुए हैं’

यहां के छात्रों का कहना है कि जेएनयू को टारगेट करने का कारण सिर्फ यही है की हम सिस्टम से सवाल पूछते हैं ।

छात्रों की मांग को पूरी तरह मान लेने का प्रोपोगेंडा फैलाया गया और बहुत कम हिस्से को वापस लिया गया,लेकिन जेएनयू के छात्र अभी भी अपनी डिमांड के साथ लड़ रहे हैं।

शायद मेरे पहले पेरेग्राफ वाला सवाल आपने तलाश लिया होगा, अरे वही की सरकार को जेएनयू से क्यों दिक्कत है,यहां सिर्फ एक समझनी चाहिए की सत्ता को सवालों से दिक्कत होती है ये सब समझते हैं और जेएनयू हर बार सत्ता के लिए सवाल बना है।

अहमद कासिम : मीडिया छात्र,जामिया मिल्लिया इस्लामिया

 

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