एक मुस्लिम नागरिक का गहलोत सरकार के नाम खुला ख़त

राजस्थान सरकार में मुस्लिम कौम की नुमाईंदगी भी रहेगी लेकिन सिर्फ यहीं पर हमारी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाएगी हमारे मुद्दे समाप्त नहीं हो जाएंगे हमारे मसले हल नहीं हो जाएंगे बल्कि, यह बात भी समझनी होगी कि मुस्लिम समाज के क्या मामले हैं, क्या समस्याएं हैं!

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राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में अल्पसंख्यक समाज ने कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए जमकर कांग्रेसी उम्मीदवारों को वोट दिए और अब कांग्रेस पार्टी ने बहुमत भी हासिल कर लिया और एक नई सरकार जल्द ही काम शुरू कर देगी.   अल्पसंख्यक समाज ने इस चुनाव में कौमी एकता और मुल्क व राजस्थान की तरक्की के लिए एक नई मिसाल पेश की जिसका सबसे बेहतरीन उदाहरण टोंक विधानसभा है शुक्र है कि इस नई सरकार में मुस्लिम कौम की नुमाईंदगी भी रहेगी लेकिन सिर्फ यही पर हमारी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाएगी हमारे मुद्दे समाप्त नहीं हो जाएंगे हमारे मसले हल नहीं हो जाएंगे बल्कि, यह बात भी समझनी होगी कि हमारे क्या मामले हैं हमारी क्या समस्याएं हैं.

जहां तक मैं समझता हूं सबसे बड़ी हमारी जिम्मेदारी यह है कि हम अपनी आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतर योजनाएं और उनको अमली जामा देकर बेहतर माहोल कायम कर सके. कौम के नौजवानो को दुनियावी और दीन की तालीम के लिए बेहतरीन इन्तेजाम हो हमारे नोजवानो के बेहतर मुस्तकबिल के लिए काम किए जाएँ.

मेरे अनुसार मुस्लिम कौम की हुकूमत से निम्न मांगे हैं और इन मांगो को पूरा करवाने के लिए हर नागरिक को संघर्ष करना चाहिए

  • मुस्लिम समाज की बेहतर तालीम के लिए मदरसों का आधुनिकीकरण होना चाहिए और तमाम सुविधाएं मदरसों और मदरसों में पढ़ने वाले बच्चो और पढ़ाने वाले अध्यापकों को मिलनी चाहिए जिससे कि मुस्लिम समाज तरक्की के पायदान को छू सके और अपनी स्थिति और पहचान को सुधार कर सके. क्यूँ कि मुस्लिम समाज के अधिकतर स्टूडेंट्स मदरसों से जुड़े हुए हैं और इन मदरसो मे सेवा दे रहे पैराटीचर हाशिये पर है.
  • जिन इलाको में एक बड़ी मुस्लिम आबादी निवास करती है वहां भी सभी आधुनिक सुविधाओं को विकसित किया जाए क्यों कि जब मुस्लिम बस्तियों का अवलोकन किया जाता है तो एक अलग ही तस्वीर नजर आती हे चारो तरफ गन्दगी के अंबार और जन सुविधाओं से वंचित एक मायूस माहौल नजर आता है.
  • सरकारी नोकरियो में मुसलमानों की भागीदारी ना के बराबर है, ऎसा कोई भी विभाग नहीं जहां इनका प्रतिनिधित्व हो. एक लोकतांत्रिक सरकार की यह जिम्मेदारी है कि सभी समुदायो का हुकूमत और प्रशासन सभी में प्रतिनिधित्व तय किया जाए. इसलिए सरकार को चाहिए कि मुसलमानो को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जाए और योजनाओं को अमली जामा पहनाया जाए.
  • देश के हर जिला मुख्यालय में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए निशुल्क हॉस्टल सरकार के द्वारा खोले जाने चाहिए. कुछ जिलों में अल्‍पसंख्यक समाज के नोजवानो के लिए यह हॉस्टल खोले भी गए हैं लेकिन बजट के अभाव और सरकार की अनदेखी के कारण अल्‍पसंख्यक समाज को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसलिए सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि इस ओर भी सरकार को पूरा ध्यान देना चाहिए.
  • अल्‍पसंख्यक समाज को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए ऐसी योजनाओं को तैयार किया जाए जिससे कि अल्‍पसंख्यक समाज के नोजवान रोजगार के लिए आसानी से बैंक से ऋण ले सकें और उन्हे आसान किस्तों में चुका भी सके. गारन्टर जेसी कठोर शर्तो को हटाने की जिम्मेदारी सरकार की है. अभी तक योजनाएं तो बनी हुई हैं लेकिन आंकड़े एक अलग ही तस्वीर बयान करते हैं और सरकार की अनदेखी को उजागर करते हैं नाम मात्र के लोग हैं जो बैंक योजनाओं का लाभ उठा पा रहे हैं आखिर ऎसा क्यूँ?
  • ST , SCs के समान सभी प्रकार की स्कॉलरशिप माइनॉरिटी स्टूडेंट्स को भी मिलनी चाहिए. स्कॉलरशिप के नाम पर योजनाए तो हैं लेकिन अक्सर बजट का अभाव देखने को मिलता है इसलिए सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों तय होना चाहिए!
  • वक्फ बोर्ड अल्‍पसंख्यक विभाग, मदरसा बोर्ड और अन्य बोर्ड्स को संवेधांनिक दर्जा दिया जाए और इन विभागों की राजनीतिक नियुक्ति प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया जाए. पिछली गहलोत सरकार में मौलाना फजलें हक़ को मदरसा बोर्ड का Chairman सरकार के चार साल गुजर जाने के बाद बनाया गया और सरकार के द्वारा फौरमलटी की गयी. इसलिए सरकार को सभी बोर्ड के सदस्यों और अध्यक्ष का मनोनयन तय समय पर किया जाए और इस पूरी प्रोसेस को पारदर्शी बनाया जाए.
  • जिन वक्फ संपत्तियों पर समाज के साहूकारों और गुंडों ने अतिक्रमण कर रखा है उनको हटाकर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए और वक्फ बोर्ड को पूरी तरह सशक्त बनाया जाना चाहिए.
  • समस्त प्रशासनिक विभागों मे माइनॉरिटी हेल्प डेस्क की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कि लोगो को अपनी समस्याओं को अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाने में आसानी हो सके.
  • पंचायत राज चुनावों और नगर पालिकाओं नगर परिषद और नगर निगम के चुनावों में माइनॉरिटी का भी प्रतिनिधित्व हो इसकी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए.

और भी कई मुद्दे हैं बहुत से मसले हैं अल्‍पसंख्यक समाज ने बड़े अरमान सजा कर अपनी समस्याओं के निस्तारण और विकास की धारा में जुड़ने के लिए राहुल की अवाज से अवाज मिलाई है इसलिए अब गहलोत सरकार की जिम्मेदारी है कि जो सपने आपने अल्‍पसंख्यक समाज को दिखाए हैं अब उन्हे पूरा भी ज़रूर किया जाना चाहिए.

लेखक : मास्टर हैदर अली अंसारी, बारां राजस्थान

 

(लेखक के विचारों व संस्था के मत में मतभेद हो सकता है)

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