निरक्षरता से आज़ादी ही वास्तविक आज़ादी है

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दि वीमेन एजुकेशन एंड इम्पावरमेंट ट्रस्ट का‌ एक वर्षीय अभियान

हमारे देश भारत को ब्रिटेन से आज़ादी मिले पचहत्तर साल हो चुके हैं। आज़ादी के बाद, देश ने कई मोर्चों पर अच्छी प्रगति की। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने और अपने निवासियों के मौलिक अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा देने का गौरव इसे प्राप्त है लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि देश की एक बड़ी आबादी बुनियादी शिक्षा से वंचित है।

2011 की सामाजिक, आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) के अनुसार, 315.7 मिलियन भारतीय लोग पढ़ना और लिखना नहीं जानते हैं। ऑक्सफ़ैम की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया की निरक्षर आबादी के 37 प्रतिशत लोग हमारे देश में रहते हैं। 1947 में जब देश को आज़ादी मिली, तब साक्षरता दर 12‌ प्रतिशत थी। स्वतंत्र भारत ने पचहत्तर साल में साक्षरता दर में सिर्फ़ छह गुना वृद्धि दर्ज की है। एक लोकतांत्रिक और स्वतंत्र देश में, जहां शिक्षा को मौलिक और संवैधानिक अधिकार माना जाता है और देश के सभी नागरिकों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की बात की जाती रही है, यह तथ्य कि एक बड़ी आबादी बुनियादी शिक्षा से वंचित है, कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त को दर्शाता है। 135 देशों की सूची में, हम महिला साक्षरता दर के मामले में 123 वें स्थान पर हैं। पुरुष और महिला साक्षरता के अनुपात में, हमारी स्थिति श्रीलंका और बांग्लादेश से भी पीछे है। श्रीलंका और बांग्लादेश में यह अनुपात क्रमशः 0.97 और 0.85 है जबकि भारत में यह अनुपात 16.78 है। यह अनुपात भारत में लिंग आधारित भेदभाव को दिखाता है।

किसी भी देश की साक्षरता दर उस देश के विकास के स्तर को दर्शाती है। यह नागरिकों के कौशल को विकसित करने, जागरूकता लाने और उन्हें समाज के प्रति ज़िम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आबादी को मुल्क पर बोझ‌‌ बनाने या उसे‌ संसाधन में बदलने का सीधा‌ संबंधित साक्षरता से है। ये‌ हर व्यक्ति का मूल अधिकार है कि उसे शिक्षा प्राप्त करने के अवसर प्राप्त हों। शिक्षा वह साधन है जिसके द्वारा वह गुलामी की ज़ंजीरों से मुक्त होता है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनता है। निरक्षरता व्यक्ति को बर्बाद कर देती है। उसकी क्षमताओं और कौशल को निखरने का मौक़ा नहीं मिलता, वह अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति सजग नहीं हो पाता और ना ही समस्याओं के समाधान का रास्ता उसको‌‌ नज़र आता है,‌ जिसका नतीजा यह निकलता है कि उसका सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक शोषण होता है और वह ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी का शिकार होता रहता है।

दि वीमेन एजुकेशन एंड इम्पावरमेंट ट्रस्ट (TWEET) एक राष्ट्रीय स्तर का ग़ैर‌ सरकारी संगठन है। विज़न 2026 के तहत चलने वाला‌ यह संगठन महिलाओं के मुद्दों पर काम करता है। इस संगठन ने देश में निरक्षर महिलाओं की समस्याओं को हल करने, उनके साथ होने वाले शोषण से मुक्त करने और उन्हें शिक्षित करने के लिए ‘फ़्रीडम फ़्रॉम लिटरेसी’ के शीर्षक के तहत एक वर्ष का अभियान चलाने का निर्णय लिया है। संगठन ने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में इस अभियान की घोषणा की। 2019 में अपनी स्थापना के बाद से, संगठन ने महिलाओं के लिए कई साक्षरता केंद्र स्थापित किए हैं। महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए अनेक क्षेत्रों में काम करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचीं कि उनकी अशिक्षा ही उनकी समस्याओं की जड़ है। इन समस्याओं को पढ़ने-लिखने में सक्षम बनाकर ही दूर किया जा सकता है। शिक्षा के माध्यम से ही महिलाओं को स्वतंत्र बनाकर समाज में बड़े पैमाने पर बदलाव लाया जा सकता है।

इस अभियान का एक मुख्य उद्देश्य निरक्षर महिलाओं को धर्म और भाषा का भेद किए बिना साक्षर बनाना है और उनकी शिक्षा का प्रबंधन करना है। एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य देश के शिक्षित लोगों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करना और उन्हें इस काम के लिए प्रेरित करना है कि वे अपने स्थान पर वॉलंटियर करते हुए दस महिलाओं को साक्षर बनाने का काम करें। हम देश के सभी नागरिकों से आगे आने और इस अभियान का समर्थन करने की अपील करते हैं‌ कि वे इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव देने के अलावा निरक्षर महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करें, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें, शिक्षित महिलाओं को वॉलंटियर करने के लिए प्रोत्साहित करें, साथ ही आर्थिक सहयोग भी करें।

जो लोग संगठन के वॉलंटियर बनेंगे, उनके लिए भी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने का एक सुनहरा अवसर है। यह अभियान उनके लिए समाज की सेवा करने और उनके नेतृत्व कौशल को विकसित करने का एक अच्छा साधन साबित होगा। ट्रेनिंग सेशन्स के माध्यम से उन्हें ज़रूरी ट्रेनिंग, वॉलंटियर किट और सिलेबस दिया जाएगा। एक वर्ष का अभियान पूरा होने पर उन वॉलंटियर्स को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा जो इस साक्षरता अभियान का सफल हिस्सा रहे हैं। इस अभियान से जुड़ने का बहुत ही आसान तरीका है कि आप इसके पोस्टर पर दिए गए नंबर पर रजिस्टर करें। आगे संगठन की टीम द्वारा आपको निर्देशित किया जाएगा।

लेखिका :शाइस्ता रफअत

अनुवाद : तल्हा मन्नान

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