पर्यावरण एवं साइबर की जाल में मानवता

0
385

पर्यावरण एवं साइबर की जाल में मानवता

देश के विकास में मानव संसाधन का योगदान, शरीर में गुर्दे की समान है यदि वह अपना कार्य उचित ढंग से ना करे तो अनेकों समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। ईश्वर ने जहां एक तरफ दृश्यात्मक दुनिया का निर्माण किया,जहां हर प्रकार की भौतिक चीजें मौजूद हैं, पहाड़ अपनी विशालता का प्रमाण देकर प्राकृतिक सौंदर्य को निखार रहा है, नदियों की लहरें प्रकृति को सुसज्जित कर रही हैं,पेड़-पौधे,जानवर और चंद्र परिंदे अपने रूत में हैं,विभिन्न जगहों के अलग-अलग मौसम संसार की उत्कृष्टता को बढ़ा रही हैं तो दूसरी तरफ मानव ने एक अदृश्य दुनिया का भी निर्माण किया है जिसे साइबर दुनिया के नाम से जाना जा सकता है। जहां मनुष्य ने अदृश्य दुनिया में घूमने, मनोरंजन ,हितों की पूर्ति एवं दूरसंचार के माध्यम का विकास किया।
जब ईश्वर ने मानव को अपने तमाम मखलूकों में सबसे उत्कृष्ट स्थान प्रदान किया और अपना उत्तराधिकारी मनोनीत किया और यह दायित्व भी दिया कि वह ईश्वर द्वारा बताए निर्देशानुसार उसका प्रयोग कर अद्ल व इंसाफ एवं केफ़ायतशेआरी का प्रमाण दे।ताकि मनुष्य में ईश्वर की बंदगी का एहसास बाकी रहे और यह दृष्टिकोण संपूर्ण विश्व में फैल जाए लेकिन जब हम वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों का आकलन करते हैं तो मनुष्य एक शोषणकर्ता का रूप धारण कर चुका है। अर्थात विभिन्न प्रकार की पर्यावरण संबंधी समस्याएं जन्म ले चुकी हैं जिसने मानव जीवन को त्रस्त करना शुरू कर दिया है।
वायु प्रदूषण: हम श्वसन संबंधी आवश्यकताओं के लिए वायु पर निर्भर रहते हैं वायु प्रदूषण सभी जीवो को क्षति पहुंचाते हैं, फसल की वृद्धि एवं उत्पाद कम करते हैं, इनके कारण पौधे अपरिपक्व अवस्था में ही मर जाते हैं, इसके साथ-साथ मनुष्य और पशुओं के स्वसन तंत्र पर भी काफी हानिकारक प्रभाव डालते हैं। खासकर महानगरों में स्वचालित वाहन भी वायुमंडल प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक हैं।जैसे-जैसे सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ रही है यह समस्या अन्य शहरों में भी पहुंच रही है।
जल प्रदूषण: सभी प्रकार के अपशिष्ट का निपटान जलाशयों में ही किया जा रहा है विश्व के अनेकों भाग में तालाब ,झील, नदी एवं महासागर के जल प्रदूषित हो रहे हैं नदियों में रासायनिक कचरे ,नाली के पानी ,मानव व पशुओं की लाशों के अवशेषों से भरे होने के कारण यह जल प्रत्यक्ष रूप से बहुत खतरनाक हैं । भारत के 3119 शहरों में से 209 में आंशिक रूप से तथा केवल 8 में मल जल को पूर्ण रूप से उपचारित करने की सुविधा है।
ग्रीन हाउस गैसों के स्तर में वृद्धि के कारण पृथ्वी की सतह का ताप काफी बढ़ गया है इसके कारण विश्वव्यापी गर्मी में बढ़ोतरी हुई है। गत शताब्दी में 0 से 6 डिग्री सेंटीग्रेड वृद्धि रिकॉर्ड की गई है और 2100 तक 1.4 से 5.8 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके कारण जलवायु परिवर्तन विकराल रूप लेती जा रही है। बर्फ की चट्टाने तेजी के साथ पिघल कर समुद्र तल के स्तर में वृद्धि कर रही है। समतापमंडल में ओजोन की परत में छेद होता जा रहा है जबकि ओजोन परत सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करने वाले कवच का काम करता है। इसके अतिरिक्त मृदा अपरदन, मरुस्थलीकरण, वनोन्मूलन इत्यादि पर्यावरण की प्रमुख समस्याएं हैं जिससे पूरा विश्व ग्रस्त है।
दूसरी और मनुष्य द्वारा बनाई गई साइबर दुनिया ने भी बहुत सारी चिंताओं को जन्म दिया है।
सूचना प्रौद्योगिकी संचार का जादुई माध्यम है। इसकी पहुंच जीवन के हर क्षेत्रों में हो चुकी है चाहे वह सूचना का हो, व्यापार का हो, अपराध का हो या मनोरंजन का हो। यह इतना व्यापक है कि इसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। सूचना प्रौद्योगिकी अपने अभिसारी रूप से सूचना प्रसार के विभिन्न विधियों को सम्मिलित करता है जैसे प्रिंट मीडिया आकाशवाणी दूरदर्शन मोबाइल कंप्यूटर एवं इंटरनेट।
साइबर वास्तव में कंप्यूटर इंटरनेट और उसके संलग्न उपकरणों के प्रयोग से मनचाही जानकारी प्राप्त कराने वाला उपकरण या मार्ग है। इस माध्यम से मिलने वाली जानकारी अंतरिक्ष में एक काल्पनिक स्पेस से गुजरती हुई पलक झपकते ही हम तक पहुंच जाती है जिसे साइबर स्पेस कहते हैं। जब इसका दुरुपयोग होता है तो उसे साइबर क्राइम का संज्ञा दे दी जाती है।उस अपराध को परिभाषित करने वाले कानून साइबर लॉ कहलाते हैं। जिस माध्यम से यह साइबर तंत्र संचालित होता है उसे साइबरनेटिक्स कहते हैं।
प्रौद्योगिकी का उपयोग जितने मानव जीवन को सुखद अर्थात सृजन और विकास के लिए किया गया उसने उतना ही मानव जीवन को भी नष्ट किया है। सूचना प्रौद्योगिकी के साथ-साथ साइबर क्राइम का भी उदय हुआ। जिसने अपराधशास्त्र में एक नए अध्याय को जन्म दिया। अनाधिकृत रूप से कंप्यूटर प्रोग्राम या डाटा में पहुंचना या पहुंचने का प्रयास करना, संरक्षित डाटा से कोई छेड़छाड़ या परिवर्तन करना एवं नेटवर्क के संचार प्रणाली को किसी भी प्रकार से प्रभावित करना है। साइबर अपराध के अंतर्गत परंपरागत एवं गैर परंपरागत अपराध अपने चरम सीमा पर किया जा रहा है। परंपरागत अपराध में कंप्यूटर नेटवर्क के द्वारा वित्तीय अपराध, साइबर पॉर्नोग्राफी, ऑनलाइन गैंबलिंग, बौद्धिक संपदा संबंधित अपराध, कपट, मानहानि एवं कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से धमकी इत्यादि को सम्मिलित किया जा सकता है तो गैर परंपरागत अपराध में ईमेल स्पूफिंग, वेब डिफेसमेंट, ईमेल बुम्बलिंग, वायरस अटैक, इंटरनेट टाइमिंग थीफ़, वेब चेक इन इत्यादि को सम्मिलित किया जा सकता है।
ईस प्रकार के अपराध ने लोगों के निजता के साथ खिलवाड़ किया है। इसके माध्यम से जासूसी का चलन भी तेजी के साथ बढ़ रहा है।वर्तमान में पेगासस एक उदाहरण है।
साइबर अपराध के रूप में हमारे समाज को एक ऐसे खतरे का सामना करना पड़ रहा है जिससे निपटने के लिए ना तो पर्याप्त कानून है, ना तफ्तीश की उचित तकनीक और ना उनको लागू करने वाले प्रशिक्षित लोग हैं। अपराधियों को इसमें गोपनीयता का सुरक्षा कवच स्वतः प्राप्त हो जाता है जिसे भेदना अत्यंत कठिन होता है। वे न केवल अश्लील सूचनाओं का संगठित व्यापार कर रहे हैं बल्कि धड़ल्ले से दूसरों के बैंक खाते से रुपया भी उड़ा रहे हैं और इस तरह के दूसरे अपराध कर रहे हैं जिनकी कल्पना भी हम नहीं कर सकते हैं।
समुचित रूप से देखा जाए तो मानवता के प्राकृतिक नैतिक मूल्यों में बहुत तेजी से ह्रास होता जा रहा है। जो मानव समाज के लिए बहुत बड़े चिंता का विषय है। पर्यावरण एवं साइबर संबंधी चुनौतियों को बहुत ही गंभीरता से लेने और उसका उचित समाधान तलाशने की आवश्यकता है अन्यथा मानव सभ्यता बहुत बड़े खाई में गिर जाएगी फिर मानव सभ्यता को विकास का स्वप्न देखना और उसको साकार कर पाना बहुत मुश्किल होगा।

✍️ वसीम अकरम फलाही

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here