अंधेरी रात में रौशन चिराग़ वाले हैं, उन्हें सलाम!

जिस समय जे॰एन॰यू॰ में कन्हैया कुमार को घेरा गया था, उस समय एक मुस्लिम विद्वान ने बड़े दुःख के साथ पूछा कि मुस्लिम दुनिया में कन्हैया कुमार जैसा कोई भी आगे क्यों नहीं आया? उन्हें बताया गया कि उमर ख़ालिद भी कम प्रसिद्ध नहीं हैं, इसलिए उन्होंने कहा, ‘‘चलिए मैंने मान लिया, लेकिन मुस्लिम समाज में गौरी लंकेश क्यों नहीं पैदा होती?’’ गौरी लंकेश का त्याग और बलिदान निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन नागरिकता क़ानून का विरोध करने वाले जामिआ की बाहिजाब छात्रा आइशा रैना और लदीदा ने साहसपूर्वक यह साबित कर दिया कि ‘वे भी किसी से कम नहीं हैं’...

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डॉ॰ सलीम ख़ान

अंधेरी रात में रौशन चिराग़ वाले हैं, उन्हें सलाम! वो शाहीन बाग़़ वाले हैं
शाहीन बाग़ देश भर में प्रतिरोध का एक उज्ज्वल प्रतीक बन गया है। किसी समाचार के साथ या फ़ोटो के नीचे लिखा हो कि अमुक जगह का ‘शाहीन बाग़’ तो पाठकों या दर्शकों को यह जानने की ज़रूरत नहीं होती कि ये लोग क्यों इकट्ठा हैं? वे क्या चाहते हैं? इस विरोध का उद्देश्य क्या है? वर्तमान में, न केवल उत्तर प्रदेश के लखनऊ, अलीगढ़ और देवबंद, बिहार के गया, अररिया, मुजफ्फरपुर, किशनगंज और सब्ज़ी बाग़, दरभंगा के लालबाग, सहरसा, पश्चिम बंगाल के रौशन बाग़, बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जैसे कई राज्यों में भी ‘शाहीन बाग़’ का एक दृश्य देखने को मिल रहा है। प्रधान मंत्री मोदी तीन तलाक़ को उचित ठहराते हुए कहते थे कि वह इसके माध्यम से मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं। उन्हें उस समय मुस्लिम महिलाओं की ताक़त का अनुमान नहीं था। सी॰ए॰ए॰ और एन॰आर॰सी॰ के खि़लाफ़ विरोध ने उन्हें यह समझने का मौक़ा दिया होगा कि मुस्लिम महिलाएं कितनी जागरूक और साहसी हैं। इसलिए, प्रधान मंत्री को अब हिंदू महिलाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, लेकिन वह इस तरह का जोखिम नहीं उठा सकते हैं, क्योंकि जो व्यक्ति अपनी पत्नी को नियंत्रित करने में विफल रहता है, वह भारत भर में महिलाओं के गु़स्से पर कैसे क़ाबू पा सकेगा?
जिस समय जे॰एन॰यू॰ में कन्हैया कुमार को घेरा गया था, उस समय एक मुस्लिम विद्वान ने बड़े दुःख के साथ पूछा कि मुस्लिम दुनिया में कन्हैया कुमार जैसा कोई भी आगे क्यों नहीं आया? उन्हें बताया गया कि उमर ख़ालिद भी कम प्रसिद्ध नहीं हैं, इसलिए उन्होंने कहा, ‘‘चलिए मैंने मान लिया, लेकिन मुस्लिम समाज में गौरी लंकेश क्यों नहीं पैदा होती?’’ गौरी लंकेश का त्याग और बलिदान निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन नागरिकता क़ानून का विरोध करने वाले जामिआ की बाहिजाब छात्रा आइशा रैना और लदीदा ने साहसपूर्वक यह साबित कर दिया कि ‘वे भी किसी से कम नहीं हैं’। गौरी लंकेश और आइशा जैसी नारियों का अत्याचारियों के एक तूफान के सामने पहाड़ की तरह डट जाना निश्चित रूप से एक बड़ी बात है, लेकिन सामूहिक रूप से हज़ारों महिलाओं का निरंतर प्रदर्शन साहस की एक असाधारण अभिव्यक्ति है। भारत के लिए वैश्विक स्तर पर ऐसा उदाहरण पेश करना मुश्किल है। यह एक महीने का प्रयास है जो न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक मीडिया को आकर्षित करने में सफल रहा है।
शाहीन बाग़ प्रदर्शन में शामिल रैहाना का दो साल का बच्चा है। उसका तर्क बहुत सरल है, वह उसकी भागीदारी का कारण बताती है: ‘‘मैं बिहार से हूँ। हमारे पास घर बनाने के लिए कोई ज़मीन नहीं है। यहां किराए के कमरे में हैं। सुबह अपना घर का काम पूरा करने के बाद, मैं दूसरों के घरों में काम करके अपना घर चलाती हूं। ऐसे में अगर मोदी हमसे सबूत मांगेंगे तो हम कौन सा काग़ज़ दिखाएंगे? मैं रोज़ रात को यहां आती हूं, ताकि वह मेरे बेटे सहित मुझे देश से न निकाल दें।’’ शाहीन बाग़ के अलावा, विभिन्न स्थानों से विभिन्न धर्मों की महिलाएं अपनी एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रदर्शन में भाग लेती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर से आने वाली प्राची शर्मा का मुद्दा बहुत अलग और अनूठा है। विरोध के चैथे दिन, पत्रकार के रूप में रिपोर्टिंग के लिए शाहीन बाग़ पहुंचीं और नौकरी को अलविदा कहकर वहीं की हो गई। प्राची आंदोलन में मंच की संयोजिका हैं और रात भर वहीं रहती हैं। प्राची विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ पुलिस की बर्बरता पर खेद व्यक्त करती हैं और इसकी निंदा करती हैं। प्राची के अनुसार, ‘‘पुलिस प्रदर्शनकारियों को वापस बुलाने के लिए कह रही है, लेकिन महिलाओं ने सी॰ए॰ए॰ के लौटने तक आंदोलन जारी रखने का फै़सला किया है।’’
पुलिस शाहीन बाग़ के प्रदर्शन को यातायात के बहाने हटाना चाहती है। इसमें कहा गया है कि कालिंदी कुंज-सरिता विहार राजमार्ग बंद होने से जहां सैकड़ों यात्री परेशान हैं। लोगों को डी॰एन॰डी॰ से नोएडा तक लंबे ट्रैफ़िक जाम का सामना करना पड़ता है। सरिता विहार और मदनपुर खादर के लोगों ने भी 12 जनवरी को दक्षिणपूर्वी ज़िले में उपायुक्त कार्यालय तक मार्च किया और सड़क यातायात बहाल करने का अल्टीमेटम दिया। विरोध के कारण शाहीन बाग़ के निवासी भी पीड़ित हैं। उन्हें आर्थिक रूप से नुक़सान भी पहुँचाया जा रहा है, लेकिन किसी महान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बड़े से बड़ा बलिदान करने की पवित्र भावना के सामने छोटे नुक़सानों की गणना नहीं की जाती।
इस वजह से, कुछ प्रशंसनीय घर मालिकों ने इस महीने का दुकानों का किराया छोड़ दिया है। इस बारे में रिज़वान कहते हैं, ‘‘आंदोलन के कारण दुकानें नहीं खुल सकीं। यदि उनके पास आय नहीं है, तो मैं एक महीने के लिए किराए पर नहीं लेने से उनके नुक़सान को कुछ हद तक कम कर सकता हूं। यह आंदोलन बहुत महत्वपूर्ण है।’’ सोनू वारिसी ने यहां तक कहा,‘‘जब तक यह आंदोलन जारी रहेगा, मुझे अपने किरायेदारों से एक भी रुपया नहीं मिलेगा। लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन में मेरा योगदान जबरदस्त है।’’ यह त्याग और आंदोलन की भावना है।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुस्लिम नेतृत्व की दूरदर्शिता और परिपक्व विचारधारा से एन॰आर॰सी॰ के खि़लाफ़ चलने वाला आन्दोलन अब हिंदू-मुस्लिम एकता और साझे विरोध का प्रतीक बन गई है। शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आल इंडिया मुस्लिम यूथ फ़ोरम के टी॰एम॰ ज़ियाउल हक़ ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन ने पूरी दुनिया को संदेश दिया है कि यहां की महिलाएं अपने अधिकारों और देश के संविधान की रक्षा करने में किसी से पीछे नहीं हैं। दमनकारी सरकार न केवल मुसलमानों, बल्कि हिंदुओं के भी ख़िलाफ़ और देश के लिए घातक है। हिंदू-मुस्लिम एकता का यह प्रदर्शन भाजपा के लिए किसी विष के समान है क्योंकि इसकी सारी राजनीति हिंदुओं को मुसलमानों के खि़लाफ़ उकसाने और भावनात्मक रूप से उनका शोषण करने पर निर्भर है। अगर कोई भी आंदोलन इन दो वर्गों को एकजुट करता है, तो कमल को मुरझाने में देर नहीं लगेगी। शाहीनबाग़ के विरोध प्रदर्शन ने संघ परिवार की इस कमजा़ेरी को उजागर किया और इसपर भरपूर प्रहार किया। यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता है। शाहीनबाग़ के प्रदर्शनकारियों पर सरफ़राज़ बज़्मी की ये प्रशस्ति पंक्तियां पूरी तरह चरितार्थ होती हैं:
अंधेरी रात में रौशन चिराग़ वाले हैं
उन्हें सलाम! वो शाहीन बाग़़ वाले हैं
रऊनतों की कलाई मरोड़ने वाले
सलीबे-जब्र को ठोकर से तोड़ने वाले
ये ज़ाफ़रानी गुब्बारों को फुलाते हैं
उन्हें सलाम! वो शाहीन बाग़़ वाले हैं

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