विश्व भर में मनाया गया पहला अंतर्राष्ट्रीय इस्लामोफ़ोबिया विरोधी दिवस

इस दिन को मनाने के लिए 15 मार्च की तारीख़ इसीलिए चुनी गई क्योंकि यह क्राइस्ट चर्च मस्जिद पर हुई गोलीबारी की बरसी है। न्यूज़ीलैंड के क्राइस्ट चर्च स्थित अल नूर मस्जिद और लिनवुड इस्लामिक सेंटर में 15 मार्च 2019 को हुई गोलीबारी में 51 लोग मारे गए थे और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि मुसलमानों के प्रति संदेह, भेदभाव और नफ़रत ‘महामारी के अनुपात’ से बढ़ गई है।

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विश्व भर में मनाया गया पहला अंतर्राष्ट्रीय इस्लामोफ़ोबिया विरोधी दिवस

उवैस सिद्दीक़ी

15 मार्च 2023 को पूरे विश्व के मुस्लिम बाहुल्य देशों में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहला अंतर्राष्ट्रीय इस्लामोफ़ोबिया विरोधी दिवस मनाया गया। इस्लामोफ़ोबिया शब्द अंग्रेज़ी के दो शब्दों से मिलकर बनता है, जिनमें पहला इस्लाम यानि इस्लाम धर्म और दूसरा फ़ोबिया का है, जिसका अर्थ डरने या ख़ौफ़ खाने से है। लेकिन आजकल जिन मायनों में इस्लामोफ़ोबिया शब्द का प्रयोग किया जा रहा है उनमें इस्लामोफ़ोबिया की बुनियाद नफ़रत से जाकर मिलती है।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ विश्व के कई देशों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा और भेदभाव के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं जिसके नतीजे में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 15 मार्च को हर साल इस्लामोफ़ोबिया विरोधी दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 193 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 मार्च 2022 को इस्लामोफ़ोबिया का मुक़ाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित करने और अम्न व शांति को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव को अपनाया।

इस दिन को मनाने के लिए 15 मार्च की तारीख़ इसीलिए चुनी गई क्योंकि यह क्राइस्ट चर्च मस्जिद पर हुई गोलीबारी की बरसी है। न्यूज़ीलैंड के क्राइस्ट चर्च स्थित अल नूर मस्जिद और लिनवुड इस्लामिक सेंटर में 15 मार्च 2019 को हुई गोलीबारी में 51 लोग मारे गए थे और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि मुसलमानों के प्रति संदेह, भेदभाव और नफ़रत ‘महामारी के अनुपात’ से बढ़ गई है।

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, इराक़, जॉर्डन, कज़ाक़िस्तान, कुवैत, किर्गिस्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब, तुर्की, तुर्केमेनिस्तान, युगांडा, संयुक्त अरब अमारात, उज़्बेकिस्तान और यमन द्वारा सह-प्रस्तावित था।

इस्लामोफ़ोबिया विरोधी दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा गया कि, “आइए हम अपनी साझी मानवता की पुष्टि करके विभाजन की ताक़तों का मुक़ाबला करें और हम हमेशा अपने मुस्लिम भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े रहें।”

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ट्विटर पर लिखते हैं कि, “इस्लामोफ़ोबिया का मुक़ाबला करने के लिए पहला अंतर्राष्ट्रीय दिवस मुस्लिम विरोधी नफ़रत के ज़हर को ख़त्म करने के लिए कार्रवाई का आह्वान है। भेदभाव हम सभी को कम करता है। हमें इसके ख़िलाफ़ खड़ा होना चाहिए। आज और हर दिन, हमें अपनी साझी मानवता की पुष्टि करके विभाजन की ताक़तों का मुक़ाबला करना चाहिए।”

इस अवसर पर भारत में भी कई प्रभावशाली व्यक्तियों और राजनेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम० के ० स्टालिन ने अपने ट्वीट में कहा‌ कि, “इतिहास अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न के घिनौने कृत्यों से भरा पड़ा है जो मानव जाति पर एक धब्बा है। अंतर्राष्ट्रीय #Islamophobia विरोधी दिवस पर, आइए अल्पसंख्यकों के प्रणालीगत उत्पीड़न से लड़ने और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप उनके अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लें।”

वहीं केरल के मुख्यमंत्री पीनारायी विजयन लिखते हैं कि, “#Islamophobia से लड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, कार्रवाई के रूप में एक ठोस आह्वान है, जो हमें दुनिया भर में मुसलमानों के ख़िलाफ़ असहिष्णुता और घृणा अपराधों में चिंताजनक वृद्धि की याद दिलाता है। हमें एकजुट होकर नफ़रत और कट्टरता के अंधेरे को रोशन करने के लिए करुणा और सहानुभूति की एक लौ जलानी चाहिए।”

इसी के साथ जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “#Islamophobia का मुक़ाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर आइए मानवाधिकारों, धार्मिक विविधता के सम्मान को बढ़ावा देने और हिंसा, कट्टरता और विभाजन की ताक़तों से लड़ने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करें। #VasudevaKutambakam में इस्लामोफ़ोबिया के लिए कोई जगह नहीं है। #saynotoislamophobia”

पहले अंतरराष्ट्रीय इस्लामोफ़ोबिया विरोधी दिवस के चलते आज पूरा दिन सोशल मीडिया पर यह मामला चर्चा का विषय रहा।

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