कविता : हम सरकार हैं,ज़ुबान बंद रखो

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हम सरकार हैं…
हम सरदार है
हमारा हुक्म सर्वोपरि है
ज़ुबान बंद रखो
आंखे मूंद लो
तुम्हारी बुद्धि
तुम्हारा विवेक
तुम्हारा त्याग
तुच्छ हैं
हमारी शान के आगे
तुम्हारा दर्द
तुम्हारे आंसू
तुम्हारी शंकाएं
ज़िन्दगी और मौत
कुछ भी नहीं
मेरी आन के आगे
तुम हमे जाहिल न जानो
हमें मालूम हैं
त्याग व बलिदान के क़िस्से
‘मूर्खों’ के आज़ादी के नग़्मे
हम नया इतिहास लिखेंगे
एक दिन की शेर की ज़िन्दगी पर
गीदड़ के सौ दिन का आवास लिखेंगे!!

 

Abid Farooqui

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