जीन-ल्यूक गोडार्ड: चुभने वाली खंडित फिल्मों का निर्माता जिसने सभी प्रश्न सही पूछे

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-एलिसन स्मिथ, लिवरपूल विश्वविद्यालय
साभार: मकतूब मीडिया
जीन-ल्यूक गोडार्ड, जिनकी हाल ही में 91 वर्ष की आयु में मृत्यु हुई, ‘फ्रांसीसी न्यू वेव’ (Nouvelle Vague) के अंतिम जीवित सदस्य थे, यह समूह विद्रोही युवा फिल्म निर्माताओं और आलोचकों का बेहद प्रभावशाली आंदोलन था, जिन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में यह सुनिश्चित किया कि फ्रांसीसी सिनेमा फिल्म देखने वालों के ध्यान का केंद्र रहे।

अपने दोस्त फ्रांकोइस ट्रूफ़ोट और कई अन्य भविष्य के निर्देशकों के साथ, गोडार्ड ‘Cahiers du cinéma’ पत्रिका में आधिकारिक फ्रांसीसी सिनेमा की वर्तमान विनाशकारी स्थिति पर लिखते रहे थे। इसी दौर में ये लोग ‘पेरिस सिनेमैथ’ में लंबी शामें बिताने के साथ हॉलीवुड की पश्चिमी प्रस्तुतियों और थ्रिलर इत्यादि को हजम करते रहे, हालीवुड के ये उत्पाद उन दिनों पेरिस में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध थे।

उन्होंने लघु फिल्मों में अपने विचारों को आजमाया। और फिर, 1958 और 1960 के बीच, एक के बाद एक, अपनी प्रारम्भिक फीचर फ़िल्में रिलीज़ कीं। प्रभाव तत्काल था। ट्रूफ़ोट ने अपनी आत्मकथात्मक ‘The 400 Blows’ के लिए 1959 में कान्स में गोल्डन पाम पुरुस्कार जीता। एलेन रेसैनिस की ‘Hiroshima Mon Amour’ यह पुरस्कार जीतने से बहुत नजदीक से चूक गई। साल के अंत में, गोडार्ड ने Breathless रिलीज़ किया।

इस फिल्म में, जीन-पॉल बेलमंडो (जो अभी तक एक स्टार नहीं बने थे), और जीन सेबर्ग (जो कि प्रसिद्ध स्टार थीं), पेरिस की सड़कों पर पुलिस से भागते हुए दो प्रेमी हैं, और ये शहर से बाहर निकल भागने के लिए पैसों की तलाश में हैं। यह अत्यंत ऊर्जावान, स्टाइलिश और आश्चर्यजनक फिल्म थी, यह अप्रत्याशित विषयांतरों और कल्पनाशील दृश्यों से भरी हुई थी, इसने मानो पेरिस को पर्दे पर जीवंत कर दिया था।
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सांस्कृतिक मनोदशा पर मजबूत पकड़
अगले दशक में, गोडार्ड आधुनिक जीवन की नब्ज पर उंगली रखने वाले एक निर्देशक के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को मजबूत करने वाले थे। दशक की बहसों और असंतोषों के प्रति संवेदनशील, उन्होंने अमेरिकी शैली की अपनी पसंद की फिल्मों से स्टोरीलाइन लीं और उन्हें एक ऐसे ‘फ्रेम’ के रूप में इस्तेमाल किया जिस पर एक बदलते फ्रांस, व्यंग्यात्मक रेखाचित्र, विज्ञापनों और सिद्धांतकारों, कवियों और राजनीतिक प्रदर्शनकारियों के उद्धरणों को संलग्न करते रहे।
Alphaville (1965) में वह लोकप्रिय धारावाहिक नायक लेमी कॉशन को एक काव्य संग्रह के माध्यम से भविष्य के मशीनी-शहर की व्यवस्था को तोड़ते हुए प्रदर्शित करते हैं। ‘Two or Three Things I Know About Her’ (1967) में, वह एक अंशकालिक वेश्या के जीवन के एक दिन को 90 मिनट से भी कम समय में पूरे पेरिस की स्थिति के सारांश में बदल देते हैं।
1960 और 1967 के बीच गोडार्ड ने 15 फीचर फिल्में बनाईं। हर एक ने बड़े पैमाने पर, उत्साही युवा दर्शकों के बीच बहसें छेड़ीं, जिन्हें महसूस होता था कि ये फिल्में वर्तमान के बारे में बात करती थीं। वे यह स्वीकार करते हुए भी काफी खुश थे – वास्तव में, प्रसन्न – कि फिल्मों का समझना हमेशा आसान नहीं होता। 1968 का सांस्कृतिक विस्फोट तैयार हो रहा था; छात्र विरोध और कार्यकर्ता हड़ताल फ्रांसीसी (और यूरोपीय) यथास्थिति को चुनौती दे रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो गोडार्ड का कांटेदार, खंडित सिनेमा सभी सही सवाल पूछ रहा था।
1968 के बाद सब कुछ बदल गया। उस समय के कट्टरपंथी राजनीतिक चलन में बहते हुए, गोडार्ड ने मुख्यधारा के सिनेमा से अपनी वापसी की घोषणा कर दी।
फ्रांकोइस ट्रूफ़ोट के साथ उनके कटु संबंध विच्छेद ने ‘न्यू वेव’ के एक इकाई के रूप में मौजूद होने के किसी भी संभावित भ्रम का भी अंत कर दिया। वे और उनके कुछ दोस्तों ने एक अल्पकालिक प्रयोगात्मक सामूहिक, Dziga-Vertov group का गठन किया। यह केवल तीन साल तक चला, लेकिन गोडार्ड एक दशक तक व्यावसायिक स्क्रीन से काफी हद तक अनुपस्थित रहे।
एक नई दिशा
ऐसा नहीं था कि उन्होंने काम करना बंद कर दिया था। उन्होंने वीडियो के नए माध्यम (Numéro Deux (1975)) के साथ, राजनीतिक सक्रियता और टेलीविजन पर प्रयोग किए। उन्होंने ऐनी-मैरी मिएविल के साथ अपनी पेशेवर और व्यक्तिगत साझेदारी को मजबूत किया, जो उनके शेष जीवन तक चलने वाली थी।
1981 में, एक दशक बाद उनकी नई फीचर फिल्म, Sauve Qui Peut (La Vie) (Every Man For Himself), मिएविल द्वारा सह-लिखित और इसाबेल हूपर्ट अभिनीत, ने आलोचनात्मक केंद्र में जबरदस्त वापसी की।
ये “नया” जीन-ल्यूक गोडार्ड पुराने वाले की तुलना में कम प्रयोगात्मक, चुनौतीपूर्ण या नुकीला नहीं था। हालाँकि, दर्शकों की अपेक्षाएँ बदल गई थीं, और वे 1960 के दशक में लोकप्रिय युवा आइकन का दर्जा फिर से हासिल करने वाले नहीं थे। इसके बजाय, उन्होंने एक ‘अजीब’ विचारक के रूप में प्रतिष्ठा विकसित की, ऐसा ‘अजीब’ विचारक जिसने सिनेमा और राजनीति के बारे में अपने विचारों को किताबों और लेखों में समझाने के बजाय ध्वनि और छवि में चित्रित किया।
उन्होंने और मिएविल ने 1970 के दशक के अंत में अपनी प्रोडक्शन कंपनी को छोटे स्विस शहर रोले में स्थानांतरित कर दिया था, और जैसे-जैसे वे बूढ़े होते गए, वे अपने इस ठिकाने से दूर जाने के लिए अधिक से अधिक अनिच्छुक होते गए – जैसा कि ‘वेटिंग फॉर..’ के अति-आशावादी त्योहार निर्देशक प्रमाणित कर सकते हैं। वह अपनी स्वयं फिल्मों में एक अराजक, सिनेमा-जुनूनी वैरागी (First Name: Carmen (1983), और King Lear(1987)) के रूप में दिखाई देते हैं।
लेकिन वे और मिएविल लगातार काम करते रहे। फिल्म दर फिल्म निर्माण ने शोध के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और समझौता करने से इनकार की शक्ति को साबित कर दिया। सिनेमा का स्मारकीय History/ies of Cinema (1989-99) आज भी इतिहास में सिनेमा के स्थान और छवियों की ऐतिहासिक भूमिका के बारे में विचारों के लिए एक चुनौती है।
नई सहस्राब्दी की राजनीतिक चिंताएँ, यूरोप के सीमाओं पर लगातार युद्धों से लेकर वैश्विक उत्तर और दक्षिण के बीच संवाद तक, Notre Musique (2004), Film Socialisme (2010) और उनकी अंतिम विशेष प्रस्तुति, The Image Book (2018) जैसी फिल्मों में अपना बेचैन रास्ता तलाशती हैं।

इन चीजों के बारे में वे क्या कहना चाहते हैं, यह स्पष्ट करना इतना आसान नहीं है, उनके साथ सहमति की तो बात ही दूर है। लेकिन फिर, गोडार्ड ने कभी सहमति की उम्मीद के ज्यादा संकेत भी नहीं दिखाए। उनका पेशा एक उत्तेजक, परेशान करने वाली नुकीली चुभन सा था, उम्मीद है उनका असाधारण फिल्म निर्माण हमें लंबे समय तक यह याद दिलाता रहेगा।

एलिसन स्मिथ, लिवरपूल विश्वविद्यालय में यूरोपीय फिल्म अध्ययन में लेक्चरर हैं।

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