पुराने ज़ख्मों को कुरेदती है ओपेनहाइमर

क्रिस्टोफ़र नोलन की नयी फ़िल्म ओपेनहाइमर ने एक बार फिर पुराने ज़ख्मों को कुरेदा है। इसकी एक वजह शायद यह भी है कि दुनिया पागलपन और मूर्खता की चौहद्दी पर आज वैसे ही खड़ी है जैसे बीसवीं शताब्दी में खड़ी थी।

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पुराने ज़ख्मों को कुरेदती है ओपेनहाइमर

आदित्य

विश्व युद्धों के घाव से यह संसार आज तक उबरा नहीं है। इसमें कोई इन्कार नहीं कि यह लड़ाई तीसरी दुनिया और अफ़्रीक़ी देशों पर प्रभुत्व के लिए यूरोप और अमेरिका ने आपस में लड़ी, जिसका ख़ामियाज़ा सारी दुनिया को भुगतना पड़ा।

उदाहरण के तौर पर Sykes–Picot समझौता। यह एक विचित्र समझौता था। बंद कमरे में यह समझौता ब्रिटेन और फ़्रांस के अधिकारियों के बीच किया गया। ऐसे अधिकारी जो मानचित्र देखकर यह तक नहीं बता सकते थे कि इस मानचित्र में मिस्र कहां है, या सीरिया कहां है या फिर फ़िलिस्तीन कहां है। लेकिन बंद कमरे में बातचीत इसी मुद्दे पर चल रही थी कि एक बार उस्मानी साम्राज्य नष्ट हो जाए तो पश्चिम के देश मध्य पूर्व पर अपने प्रभुत्व को आपस में कैसे बाटेंगे। इस समझौते के बारे में कहा जाता है कि बातचीत के दौरान Sykes ने मानचित्र बनाने के लिए प्रस्ताव देते हुए कहा — इसमें कौन सी बड़ी बात है, मानचित्र के लिए एक बिंदु से दूसरे बिंदु के बीच रेखा खींच दीजिए। इस समझौते में जिस मानचित्र पर ब्रिटेन और फ़्रांस के बीच सहमति बनी वह मानचित्र कुछ ऐसा ही था — एक बिंदु से दूसरे बिंदु के आड़ी-टेढ़ी खींची हुई रेखाएं और उसमें भरे हुए दो रंग लाल और नीला, यह इंगित करते हुए कि कौन-सा हिस्सा किसका होगा।

इस समझौते के बारे में लोगों के बीच जागरूकता को समझने के लिए जब एक सर्वे किया गया तो पश्चिम में दस में से सिर्फ़ एक व्यक्ति ने इसके बारे में सुना था और यही सर्वे जब मिस्र में किया गया तो यह संख्या 6.5–7 निकलकर आई।

व्यवस्थित ढंग से आम जनता को इतिहास के महत्वपूर्ण मुद्दों से दूर रखने की नीति इस दुनिया में कोई नई नहीं है। पश्चिम के देश ऐसा लंबे समय से करते आ रहे हैं।

असली मुद्दा यही है। मनुष्य की महत्वकांक्षा के परिणाम स्वरूप जो पागलपन, मूर्खता और अफ़रा-तफ़री हम देखते हैं, उसे कम करके नहीं आंका जा सकता है। जब कई बुद्धिजीवी यह कहते हैं कि अब परमाणु युद्ध इसी वजह से नहीं होगा कि सबके पास परमाणु हथियार हैं तब वे मनुष्य के पागलपन और मूर्खता की शक्ति को नज़रअंदाज़ करते हैं।

क्रिस्टोफ़र नोलन की नयी फ़िल्म ओपेनहाइमर ने एक बार फिर पुराने ज़ख्मों को कुरेदा है। इसकी एक वजह शायद यह भी है कि दुनिया पागलपन और मूर्खता की चौहद्दी पर आज वैसे ही खड़ी है जैसे बीसवीं शताब्दी में खड़ी थी।

कुल मिलाकर नोलन ओपेनहाइमर की एक मानवीय छवि पेश करने की कोशिश करते हैं। मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि ओपेनहाइमर जैसे वैज्ञानिक जो परमाणु विज्ञान के विशेषज्ञ थे, क्या वे शुरू से ही इसके दुष्परिणामों के बारे में नहीं जानते थे? बेशक जानते थे। आइंस्टीन एक जर्मन वैज्ञानिक थे, नील्स बोर और फ़र्मी भी। ये सभी वैज्ञानिक जर्मनी छोड़कर इसीलिए भाग गए क्योंकि वे ख़ुद अपने हाथों में मौजूद संहारात्मक शक्ति से परिचित थे। वे जर्मनी के लिए परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहते थे। फिर वे अमेरिका या यूरोप इसलिए भी नहीं गए कि वे अमेरिका जाकर वहां हथियार बनायेंगे और हिटलर को परास्त करेंगे। परमाणु हथियार के बिना हिटलर परास्त हो चुका था और जब जापान पर परमाणु हमला किया गया, वह निश्चय ही पराजय के मुहाने पर खड़ा था। परमाणु हमला एक तरह का शक्ति प्रदर्शन था। वह अपने शत्रुओं के ख़िलाफ़ किया गया शक्ति प्रदर्शन नहीं था बल्कि अपने मित्रों पर किया गया शक्ति प्रदर्शन था। मुख्य प्रतिद्वंदी रूस था जो उस समय समाजवादी व्यवस्था से संचालित था।

ओपेनहाइमर फ़िल्म हो या Sykes–Picot समझौता — दोनों ही घटनाएं एक महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करती हैं — साम्राज्यवादी शक्तियों ने अपनी ताक़त का इस्तेमाल बहुत मूर्खतापूर्ण और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना तरीक़े से किया और बंद कमरे में अहंकार और मूर्खता में लिए गए निर्णयों ने इस दुनिया को ऐसे घाव दिए हैं जिनसे सदियों बाद भी निकल पाना संभव नहीं दिखाई देता।

एक और महत्वपूर्ण मुद्दा आइडियोलॉजी का है। परमाणु युद्ध की समस्या समाजवाद बनाम पूंजीवाद की भी है और पूंजीवादियों ने जापान पर सीधा और रूस पर अप्रत्यक्ष हमला किया। उस समय तक रूस के पास हथियार नहीं थे।

आज एक समाचार यह भी था कि जिस प्रयोगशाला में सबसे पहले परमाणु हथियार बनाए गए थे, वह प्रयोगशाला फिर से सक्रिय हो चुकी है और परमाणु हथियारों की नई खेप पर काम शुरू हो चुका है। जहां तक फ़िल्म की बात है, नोलन ने पहली बार इतनी स्पष्ट राजनैतिक फ़िल्म बनाकर बहादुरी दिखाने की कोशिश की है लेकिन बहुत अधूरे मन से। जिस मोड़ पर फ़िल्म अपने पूरे तेवर के साथ राजनैतिक युद्ध में कूदने को होती है, नोलन वहीं से गियर बदलकर ‘फ़ादर ऑफ़ एटॉम बॉम्ब’ के लिए एक अपोलॉजिस्ट बनकर रह जाते हैं।

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