जामिया छात्रों द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA), NPR, NRC के खिलाफ आंदोलन का आज 18वां दिन!

BSCEM की अध्यक्ष राजवीर ने कहा कि हम छात्र राष्ट्रवादी ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीयवादी हैं, दुनिया में जहां जहां नाइंसाफी होती है उसके खिलाफ हम बोलते हैं और जो नाइंसाफी देश के भीतर बीजेपी की सरकार कर रही है, उसके ख़िलाफ़ भी हम बोलेंगे।

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA), NPR, NRC के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन का आज 18वां दिन था। आज के दिन कड़ाके की ठण्ड के बावजूद छात्र और ओखला के लोग प्रदर्शन स्थल पर हजारों की संख्या में जमा हुए. आज के प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्रनेता भी शामिल हुए. वहीँ भारतीय राजनीति के कुछ पुराने चेहरे भी नज़र आए. इन सभी ने सरकार की मुस्लिम विरोधी और देश को बांटने वाली नीतियों का विरोध किया.
वक्ताओं की कड़ी में सबसे पहले मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे रामाशंकर सिंह ने कहा कि मुसलमान हमेशा से देश के साथ था और रहेगा। जो कोई मुसलमानों को देश से बाहर निकालने की बात करते हैं, उन्होंने उनकी निंदा की। रामाशंकर जी ने कहा कि जो जामिया आज़ादी के संघर्ष में साथ था कोई उसे ध्वस्त नहीं कर सकता। उनके इरादे टूटेंगे.
सामाजिक कार्यकर्ता ओवैस सुल्तान खान ने कहा कि जिस मुस्लिम कौम को देश के अंदर दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की साजिशें होती थी। आज वो कौम देश के संविधान को बचाने के लिए सड़कों पर है और तब तक सड़कों से वापस नहीं जाएंगे जब तक उनके अधिकार उन्हें नहीं मिल जाते। आज इस लड़ाई में मुसलमान अगुवाई कर रहा है और लोकतंत्र के लिए दूसरे उसके साथ हैं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान सभी को मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की वो कसमें भी याद दिलाई जो उन्होंने देश के विभाजन के समय मुसलमानों को खिलाई थी।
वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कासिम रसूल इल्यास ने जामिया के छात्र और ओखला की जनता को सलाम पेश करते हुवे कहा कि जब तक इस आंदोलन में उन समुदायों का भी साथ मिलेगा जिनको नागरिकता देने का वादा कर सरकार राजनीति करना चाहती है। इस आंदोलन को कोई तोड़ नहीं पाएगा।
AISA दिल्ली की अध्यक्ष कंवलप्रीत कौर ने कहा कि जो लोग देश के नागरिकों को उनके कपड़ों से पहचानते हैं और उनके खिलाफ हिंसा का समर्थन करते हैं। ये सत्ता में बैठे वो फासीवादी है जो देश को तोड़ना चाहते हैं। लेकिन छात्रों ने, शाहीन बाग़ की महिलाओं ने इन्हें ज़ोरदार जवाब दिया है।
DUTA की पूर्व अध्यक्ष नंदिता नारायण ने कहा कि, सत्ता में आज जो संघी मानसिकता वाली सरकार है, वो हर उस आवाज को दबाना चाहती है जो उसके खिलाफ है और लोकतंत्र के साथ है। लेकिन जामिया और तमाम विश्वविद्यालय के छात्र ऐसा होने नहीं देंगे। CAA के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन की एक बड़ी कामयाबी ये है कि इसमें वो लोग भी बाहर निकाल कर आएं जो अपने आपको Apolitical (गैर राजनैतिक) कहते थे।
जेएनयू के छात्र फारूक आलम ने मोदी और अमित शाह को टू इडियट्स की जोड़ी बताया। उन्होंने आज की सरकार और उसके चेहरों पर एक व्यंग्यात्मक गीत भी पढ़ा, जो उन्होंने खुद लिखा था।
BSCEM की अध्यक्ष राजवीर ने कहा कि हम छात्र राष्ट्रवादी ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीयवादी हैं, दुनिया में जहां जहां नाइंसाफी होती है उसके खिलाफ हम बोलते हैं और जो नाइंसाफी देश के भीतर बीजेपी की सरकार कर रही है, उसके ख़िलाफ़ भी हम बोलेंगे।
आज के प्रदर्शन में इन वक्ताओं के साथ कई स्थानीय लोगों और दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए छात्रों ने भी अपनी बात रखी और सरकार की छात्र विरोधी और विश्वविद्यालयों पर प्रहार करने वाली नीतियों का विरोध किया.
कई छात्रों ने आज भी “रीड फॉर रेवोल्यूशन” के नारे के साथ रीडिंग सेशन आयोजित किए.
जामिया कोआॅर्डिनेशन कमेटी के सदस्यों और जामिया के छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार अपने लोकतंत्र विरोधी कानून वापस नहीं लेती तब तक ये आन्दोलन जारी रहेगा. उन्होंने ये भी बताया कि पूरे आन्दोलन में उन्हें जामिया के एल्युमिनाई का भी साथ मिल रहा है.

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