मेरी बोर्ड की परीक्षा चल रही हैं, लेकिन मेरी किताबें तो जला दी गयी, मैं कैसे पढूंगी?

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दिल्ली में लगाई गई नफरत की आग जैसे तैसे बुझ तो गयी है लेकिन इस आग की लपटों का शिकार हुए लोगों के ज़ख्म बहुत गहरे हैं,जिन्हें भर पाना शायद ही कभी मुमकिन होगा।
आज छात्र विमर्श की टीम ने दंगाग्रस्त इलाकों का दौरा किया और लोगों से मिलकर उनकी पीड़ाओं को जानने का प्रयास भी किया है।

हमारी मुलाकात शिव विहार में रहने वाली 12 वीं कक्षा की छात्रा मीना बानों से हुई,मीना ने बताया कि कल छ: मार्च को उसका बाहरवीं कक्षा का इम्तहान है और उसके पास पढ़ने के लिए किताब मौजूद नही है,दंगे के दौरान लगाई गई आग में उसका घर भी चपेट में आ गया था,इस दौरान बहुत कुछ तोड़ दिया गया और जला दिया गया।

मीना कहती हैं ” सर मेरे घर का सबकुछ लुट चुका है और मैं बाहरवीं कक्षा में पढ़ती हूँ। कल मेरी राजनीतिक विज्ञान विषय की परीक्षा है,आप बताइए कि मैं कैसे ये एग्जाम दे पाऊंगी ? मेरे पास कोई बुक्स वगेरह भी नही हैं और मेरे घर में इतनी लूटपाट हुई है कि मेरे पास एक पैसा भी नही है। मैं काफी जगह मदद के लिए गयी है कि मुझे सरकार की तरफ से कुछ मदद मिलेगी ? हमें कोर्ट में बुलाया गया लेकिन वहां भी हमें टहलाया गया कि कभी कोर्ट जाओ कभी थाने में जाओ,यहां से स्टंप लगावाओ वहां से साइन करवाओ। हमारे पैसा एक रुपया तक नही है बताइए कैसे जाएं हम ? दंगे के दौरान जब हमारा घर जलाया गया तो हम पीछे की तरफ दीवार कूद कर दूसरे घर में चले गए,धुएं की वजह से हमें सांस लेने तक में तकलीफ हो रही थी,कुछ समझ नही आ रहा है सर,सब बर्बाद कर दिया गया है”

हमसे बात करते करते मीना का गला रूंध गया और रुआंसा आवाज़ में वो कहने लगी कि “बताइए सर मैं बाहरवीं कक्षा में हूँ मेरे करियर का क्या होगा ? मैं अपने दोस्तों से किताबें लेकर पढ़ने का प्रयास कर रही हूं लेकिन जो भी हुआ वो बहुत गलत था सर ”

जिन इलाकों में सुनियोजित तरीके से मुसलमानों के घरों को जलाया और लूटा गया उनकी विभिन्न कहानियां बहुत दर्दनाक है। छात्र विमर्श की टीम लगातार इन दंगाग्रस्त इलाकों का दौरा कर रही है,हम लगातार इन लोगों के दर्द को आपके बीच पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

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