हज़रत मुहम्मद(स०) : संघर्षशील जीवन के अनछुए पहलू

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देश और दुनिया में आए दिन हज़रत मोहम्मद(सo) के सम्मान के साथ दुर्वेव्हार की घटनाएं हो रही है और ये घटनाएं थमती हुई दिखाई नहीं दे रही है। हर दिन किसी ना किसी अराजक तत्व , अनजाने या दुश्मनी और नफरत में लिप्त अंधे तत्व की ओर से समाज में बुराई व अस्थीर्ता फ़ैलाने का प्रयास होता आ रहा है। हम ऐसी घटनाओं को नहीं भूल सकते क्योंकि यह हज़रत मोहम्मद से हमारे प्रेम से जुड़ी हुई है। हमें वो घटना भी याद है जब हज़रत मोहम्मद (स०) मक्का में काबा के पास प्राथना (नमाज़) कर रहे थे उसी समय अबुजहल जो मक्का का प्रसिद्ध व्यक्ति था उसने हज़रत मोहम्मद से दुश्मनी में पशु की खाल डाल दी और मक्का के प्रमुखों के प्रमुख लोग हंस रहे है।

हमें वह समय भी याद है जब आप तायफ़ की यात्रा करते हैं और वहां के तीनो प्रमुखों ने इस्लाम के निमंत्रण को खारिज कर दिया और आपके पीछे तायफ़ के दुष्ट युवाओं को डाल दिया ताकि वह आप (स०) को चोट पहुंचा सकें और उन दुष्ट बदमाश युवको ने पत्थरो से आपको आहत किया और तायफ़ से बाहर निकाल दिया ।
हमें वो समय भी याद है जब
अल्लाह ने हज़रत मोहम्मद को दो लड़के दिए और उनकी मृत हो गयी । इस घटना की सूचना आप (स०) के चाचा अबू लहब ने खुशी से दौड़ते हुए मक्का के प्रमुखों को दी और कहा कि अब मोहम्मद की जड़ कट गई अब मोहम्मद का नाम लेने वाला उसके बाद कोई नहीं बचा,अब उसकी कोई नर औलाद नहीं बची। यह वाक़्या हज़रत मोहम्मद का दिल दुखाने के लिए उपयोग करने लगे।

हमें वो समय भी याद है जब मक्का के बहुदेववादी लोग आपको पुजारी और जादूगर कह कर आपका मज़ाक उड़ाते थे। यह वो समय था जब हज़रत मोहम्मद (स०) को समाज से काट दिया गया, आपका व्यापार पूरी तरह से ख़त्म हो गया था, कुछ लोग ही आपके समर्थन में थे बाकि सभी आपके दुश्मन बन गए थे। इन सभी घटनाओं और मुसीबतों के बावजूद हज़रत मोहम्मद (स०) ने धैर्य और नैतिकता का बेहतरीन उदहारण प्रस्तुत किया जिसका पालन करना किसी के वश में नहीं था।
दूसरी ओर यह भी नहीं हुआ की अल्लाह ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को असहाय छोड़ा। बल्कि अल्लाह ने जिब्रील अमीन और रहस्योद्घाटन (वही) के माध्यम से बार बार हज़रत मोहम्मद (स०)को साहस और प्रोत्साहन दिया। अल्लाह कहता है (अर्थ की व्याख्या): हमने आपको कौसर दी ,अब आप अल्लाह के लिए प्रार्थना (नमाज़) करें और उसके लिए बलिदान (क़ुरबानी) करें। वास्तव में, आपके दुश्मनी में आपके दुश्मन की ही जड़ कट जाएँगी। ”(सूरह कौसर)

यह कौसर वो है जिसका अर्थ होता है ऐसी वस्तु जो अत्यंत प्रचुर मात्रा में हो। ऐसी मात्रा जिसमे संपूर्ण विश्व की भलाई और अच्छाई हो। इसलिए ईश्वर अल्लाह ने आपको संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए रहमत (दया) बनाकर इस पृथ्वी पर उतरा। आपका वैक्तिमत्व ही सभी के लिए शुभ (खैर) है। अल्लाह ने आपके नाम, काम ,कार्य को दुनिया के आखरी दिन तक के लिए सुरक्षित कर दिया।
दुनिया के सभी अच्छे कामों का श्रेय आपसे जोड़ दिया गया। अल्लाह ने क़यामत के दिन तक तुम्हारे सारे कामों को ज़िंदा रखा और सलाम और दुरूद के द्वारा तुम्हारे वचन को मज़बूत किया।

फैसले के दिन अल्लाह ने आपको कौसर नामक एक हौज़ दे रखा है जिसके बारे में हज़रत मोहम्मद (स०)कहते है कि वो एक हौज़ है जिसपर मेरी उम्मत क़्यामत के दिन (फैसले के दिन) प्रवेश करेगी और मैं उस तक पहुँचने वाला पहला व्यक्ति बनूँगा।”

और अल्लाह ने तुम्हारे सभी शत्रुओं को, जो शत्रुता और घृणा में इतने अंधे थे कि उन्होंने तुम्हारी निंदा की, तुम्हारा अपमान किया और प्रत्येक बुरी बात को तुमसे जोड़ कर दोष दिया। अल्लाह ने उनकी जड़ों को काट दिया, उन्हें लाचार कर दिया, उन्हें अकेला छोड़ दिया, उन्हें उन सभी साधनों और संसाधनों से वंचित कर दिया, जिनके कारण वे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ताना मारते थे और अब क़यामत के दिन तक कोई उनका नाम नहीं लेगा।
सूरह अल-शरह में, अल्लाह कहता है “हमने तुम्हारा दिल खोल दिया , तुम्हारा बोझ उतार दिया जिसने तुम्हारी कमर तोड़ रखी थी और हमने तुम्हरे नाम को ऊँचा कर दिया “
अल्लाह ने आपको हर तरह के मानसिक भ्रम और झिझक से शुद्ध करके आपको संतुष्ट किया है और आपकी आत्माओं को अविश्वास से ऊपर उठाया है और आपके नाम को ऊँचा कर दिया

सभी परेशनियों को आपसे दूर कर दिया जो समाज में फैली बुराई को देखकर आपको परेशान कर रही थी। फिर अल्लाह सर्वशक्तिमान ने इन सभी अपमानजनक शब्दों का जवाब देते हुए कहा: हमने तुम्हारे नाम को ऊँचा किया और ये ऐसे किया के हज़रत अबु सईद ख़ुदरी (रज़ी०) कहते है कि रसूलुल्लाह ने कहा , जिब्राईल मेरे पास आये और मुझसे कहा के मेरा रब (ईश्वर) और आप (स०) का रब (ईश्वर) पूछता है के मैंने किस तरह तुम्हारे नाम को ऊँचा किया? मैंने कहा अल्लाह ही ठीक जनता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह कहता है के जब मेरा नाम लिया जायेगा तो मेरे साथ तुम्हारा(मोहम्मद स०) का भी नाम का उल्लेख किया जायेगा”

यह बात ईश्वर अल्लाह द्वारा तब कही गयी
जब हज़रत मोहम्मद (स०) के साथ पूरे मक्का में कुछ को छोड़कर कोई नहीं था। उस समय अल्लाह ने बहुदेववादियों के माध्यम से आप(स०) की मदद की। हज के महीने में, जो लोग हज के लिए बाहर से आते थे, बहुदेववादी मक्का में उनके तंबू में जाते थे और कहते थे कि मुहम्मद नाम का एक व्यक्ति है जो खतरनाक है और ऐसा जादूगर है जो भाई- भाई , पिता-पुत्र और पति-पत्नी को अलग करता है। वह एक नया धर्म लाया है, इसलिए उससे दूर रहो। और इसका नतीजा यह हुआ कि कई लोग हज़रत मोहम्मद (स०) को देखने की इच्छा से गए और मदीना के लोगों सहित कई लोगों ने इस्लाम धर्म अपना लिया।
उसी तरह मदीना में रहने वाले पाखंडियों और यहूदियों ने भी नफरत और ईर्ष्या से आपको बदनाम करने में अपनी गतिविधियों का प्रदर्शन किया, लेकिन हज़रत मोहम्मद (स०) का धन्य जीवन लोगों के दिलों को वश में करता रहा ।

आज भी, हर शक्ति जो इस्लाम और मुहम्मद (स०) के नाम को नष्ट करना चाहती है, वह भी पैगंबर (स०) और इस्लाम के पक्ष में कार्य कर रही है। विभिन्न समाचार पत्रों और वेबसाइटों को पढ़कर यह स्पष्ट है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में जहां कहीं भी इस्लाम या मुहम्मद (स०) का अपमान किया गया है, लोगों ने इस्लाम और मुहम्मद (स०)की धन्य जीवनी पढ़ने में रुचि दिखाई है। और पढ़कर इस्लाम को स्वीकार कर लिया और उसके प्रचार व प्रसार में अपने जीवन को झोंक दिया। और ऐसे कई देश यूनाइटेड किंगडम , अमेरिका सहित हमारे प्यारे देश के रूप में कई उदहारण हैं। यह हमें पूरे कुरान की प्रामाणिकता का प्रमाण देता है जिसने चौदह सौ पचास साल पहले कहा था,
“हे मुहम्मद, हमने आपके नाम को ऊँचा कर दिया है।”

-मोहम्मद ताबिश सौदागर


संदर्भ :-
(2) सूरह कौसर
(2) सूरह शरह
(1) पवित्र हदीस
(2) पैगंबर की जीवनी (स)

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