मानव शरीर : जीवन का एकल साधन

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हमारे जन्म लेते ही एक चीज हमें दी जाती है और एक ही बार दी जाती है, वह है हमारा शरीर। यह जीवन गुज़ारने का एकमात्र साधन है जो हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर या खुदा द्वारा दिया जाता है। केवल और केवल इसके साथ ही हमें जीवन गुज़ारना होता है। इसके बिना जीवन का अस्तित्व नहीं है। यही हमारा सच्चा हमसफर है। मॉडर्न रूमानी अंदाज़ में कहूँ तो यही हमारा ‘ट्रू वैलंटाइन’ है। रुकिए मेरी बात पर शक़ करने से पहले आप एक बार खुद को शरीर के बिना इमैजिन कीजिए…अब शायद आपको मेरी बात का महत्व समझ आ रहा होगा।

एक सत्य स्वीकार कीजिए कि हमारे पास एक ही शरीर है और हमें उसी के साथ जीना है। यह सत्य स्वीकार करने के बाद आप मुझे यह बताइये कि आप इस एक मात्र अमूल्य निधि का कितना ख्याल रखते हैं? मैं अगर किसी युवा से कहूं कि अब शासन का नियम है कि आपको केवल और केवल एक ही बाइक मिलेगी और इसी से आपको अपने पूरे जीवन के सफर तय करना है। तो आप मुझे बताइये कि वह युवा उस बाइक की कितनी देख रेख करेगा? उसकी वह सर्विसिंग करवाएगा, समय पर ऑइल चेंज करवाएगा, टायर, ब्रेक, बॉडी सभी का ख्याल रखेगा। लेकिन अगर मैं कहूँ कि शरीर भी आपको एक ही मिला है और उसी में पूरी ज़िंदगी गुज़ारना है, इसका ख्याल रखो, इसकी सेहत को बनाए रखो, इसे पोषण दो, कसरत करो, परहेज़ करो, जोड़ों, दिल, किडनी, फेफड़े, लिवर, दिमाग का ख्याल रखो… आदि। तो अब वह युवा मेरी बात आसानी से नहीं मानेगा और अगर मानेगा भी तो केवल 15 से 20 दिन के लिए। फिर उसी ढर्रे पर। फिर उसी लापरवाही पर उसका जीवन लौट आएगा।

हम शरीर की अहमियत नहीं समझते। सेहत को कोई प्राथमिकता नहीं देते। शरीर को ऐसे घिस देते हैं जैसे यह हमारा है ही नहीं। नशा करके अपनेे मुंह, फेफड़े, लिवर और दिमाग को खराब कर लेते हैं। चटोरों और भुक्कड की तरह वास्तविक भूख से दुगना खा कर सो जाते हैं और फिर कई रोगों को दावत देकर इस शरीर को नष्ट कर लेते हैं। हम शरीर को होश संभालते ही खराब करना शुरू कर देते हैं और जब यह खराब हो जाता है तब हमें असली होश आता है कि अरे यह हम क्या कर बैठे! नाश, सत्यानाश और क्या।

प्रिय पाठकों आपका शरीर जब तक आपके साथ है तभी तक ज़िन्दगी का आनंद है, मज़ा है और ऑफकोर्स जीवन है। आपके जीवन का कोई भी काम शरीर के बिना नहीं हो सकता। कोई भी लक्ष्य इसके बिना नहीं पाया जा सकता। किसी की मदद इसके बिना नहीं की जा सकती। यह जब तक आपके साथ है आप किसी का भी सहारा बन सकते हैं लेकिन यह अगर आपके साथ नहीं है तो फिर आप खुद बेसहारा हो जाएंगे, आप दूसरों पर बोझ बन जायेंगे और बोझ कबतक…ज़िन्दगी भर तक… और ज़िन्दगी भर बोझ कौन उठाएगा भला? आपके अपने, आपके मित्र, आपके बीवी बच्चे आपकी बाहर की पीड़ा या समस्या को ठीक करने में आपकी मदद कर सकते हैं लेकिन आपकी चमड़ी के भीतर के संसारवाकई समस्याओं और पीड़ाओं से केवल और केवल आपको ही निपटना है। आराम, आलस, आनंद और महत्वाकांक्षा के पीछे अपने शरीर को बर्बाद न करें।

पुनःश्च मैं अक्सर अपने लेख और वक्तव्य में एक बात कहता हूँ कि, “अगर आपके पास एक स्वस्थ लिवर और पैंक्रियाज़ हैं तो आप एप्पल के संस्थापक और अपने वक़्त के सबसे ज्यादा मालदार स्टीव जॉब्स से भी ज्यादा धनवान हैं। क्योंकि उनका सारा धन मिलकर भी उन्हें ये दो अंग वापस नहीं कर सका।” इसलिए प्रिय पाठकों अपने शरीर की कद्र कीजिए, इससे प्रेम कीजिए क्योंकि “जग में तो शरीर से बड़ा साथी नहीं कोई…”

-डॉ अबरार मुल्तानी

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