प्रतिरोध- दावत का एक अनोखा तरीका

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सैयद अज़हरुद्दीन

फिलिस्तीन मुद्दे पर पिछले सात दशकों से दुनिया भर में लोग चर्चा करते रहे हैं, आए दिन ये मुद्दा मुख्यधारा मीडिया की सुर्खियां बनता रहता है। कुछ लोग सच बोलते हैं, कुछ प्रॉपगंडा को स्वीकार कर लेते हैं और कुछ तो इस मुद्दे से ही अनजान हैं। लेकिन 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले की घटनाओं से दुनिया भर में नए स्तर का हंगामा खड़ा हो चुका है।

विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार दो महीनों में 17 हजार से अधिक लोग शहीद हुए हैं, 46 हजार से अधिक घायल हैं, शहीद होने वालों में 70% फिलिस्तीनी महिलाएं और बच्चे हैं, और कम से कम 14 सौ इजरायली मारे जा चुके हैं, (23 नवंबर 2023 की संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट) और 12 सौ से अधिक लोग अब तक घायल हुए हैं।

दावत का मतलब सिर्फ अपने शब्दों से लोगों को ईश्वर की एकता की ओर आमंत्रित करना नहीं है, बल्कि इसे अल्लाह पर हमारे मजबूत ईमान के संदर्भ में भी व्यक्त किया जा सकता है। फ़िलिस्तीनियों ने मुस्लिम दुनिया को दिखा दिया है कि हम प्रतिरोध और लचीलेपन के माध्यम से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए दावत कैसे दे सकते हैं।

यह इस प्रश्न से शुरू होता है कि फ़िलिस्तीनियों में इतना दृढ़ ईमान कैसे है। कई लोगों, विशेष रूप से यूरोपीय और अमेरिकियों ने यह बयान दिया है कि वे इस बात की प्रशंसा करते हैं कि कैसे फिलिस्तीनी आमजन ईश्वर को धन्यवाद दे रहे हैं और उससे अपने शहीदों की देखभाल करने की दुआ रहे हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर यह भी व्यक्त किया कि वे इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि एक भी फिलिस्तीनी ने इस परिस्थिति पर आपत्ति नहीं जताई या भगवान से यह नहीं पूछा कि यह सब क्यों हो रहा है बल्कि इसके बजाय, वे उसे धन्यवाद दे रहे हैं और अपना पूरा विश्वास और भरोसा उस पर रखे हुए हैं। इस मजबूत विश्वास ने गैर-मुसलमानों को आश्चर्यचकित कर दिया है कि इस्लाम क्या है, जिसके कारण कई लोग पवित्र कुरआन खरीद रहे हैं – शादवा हमजा, www.thinkmarketingmagazine.com से उद्धृत।

गाजा में नरसंहार ने पवित्र कुरआन को एक ‘ट्रेंडिंग टॉपिक’ बना दिया है।

अनादोलु एजेंसी ने फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका के एक इंटरनेट कॉमिक कलाकार और फैशन डिजाइनर नेफ़रतारी मून पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में इस्लाम धर्म अपनाया है। वे बताती हैं कि उन्होंने क्यों इस्लाम स्वीकार किया: “मैं अनिवार्य रूप से यह नहीं कहूंगी कि मेरे इस्लाम अपनाने में इज़राइल का कोई हाथ था। यह केवल फ़िलिस्तीनी लोग और उनका साहस और विश्वास ही है जिसने मुझे इस्लाम की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।” मून कहती हैं कि, “फ़िलिस्तीनियों को जिस तबाही से गुज़रना पड़ रहा है उसे देखना… और इन लोगों को देखना जो अभी भी अल्लाह को पुकार रहे हैं, अद्भुत रूप से सुंदर है।”

“मुझे ऐसा लगता है कि यदि आप इन लोगों को देखें कि वे किस दौर से गुजर रहे हैं, और फिर भी अपना ईमान बनाए रखने में सक्षम हैं तो आपको इस पर गौर करना होगा और यह देखना होगा कि वह कौन सी ऐसी चीज है जो लोगों को अभी भी खुदा को अपनाए रखने और उनके अंतिम शब्दों में भी उसे याद रखने में योगदान दे रही है,” वे आगे कहती हैं।

मून फ़िलिस्तीनी लोगों का आह्वान करते हुए कहती हैं: “मैं चाहती हूँ कि आप लोग जान लें कि इस समय पूरी दुनिया आप लोगों के लिए लड़ रही है।” “मुझे पता है कि इस समय यह समझना कठिन हो सकता है क्योंकि अगर आप इसमें हैं और आपको मदद मिलती दिख रही है, लेकिन मैं वास्तव में चाहती हूं कि आप लोग जानें कि हम सब आप लोगों के लिए दुआ कर रहे हैं।”

फ़िलिस्तीनी “सबसे मजबूत लचीले लोग” – नेफ़रतारी मून

एक टिकटॉक प्रभावशाली महिला हैं जो रोमांस उपन्यास क्लब चलाती थीं, 7 अक्टूबर 2023 के बाद, गाजा में उभरे संकट को देखते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने दर्शकों के साथ मानवीय संकट पर बात करना शुरू किया, उनकी बात सुनकर उनके कुछ अनुयायियों ने उन्हें कुरआन पढ़ने का सुझाव दिया, इसके बाद उन्होंने डिस्कॉर्ड पर ‘वर्ल्ड रिलिजन बुक क्लब’ का आयोजन प्रारंभ किया, यह हैं युवा अफ्रीकी अमेरिकी महिला मेगन बी राइस। उन्हें पढ़ना पसंद है और वह शिकागो, संयुक्त राज्य अमेरिका में रहती है। कुरआन का अनुभव करने की इच्छा रखने वाली वह अकेली नहीं हैं। सोशल मीडिया पर, युवा लोग उस धर्म को बेहतर ढंग से समझने के लिए, जिसे मुख्यधारा की पश्चिमी मीडिया द्वारा लंबे समय से बदनाम किया जाता रहा है, और गाजा के मुसलमानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कुरआन पढ़ रहे हैं।

बी राइस ने द गार्जियन में अपनी कहानी सुनाते हुए बताया कि उन्होंने इस्लाम क्यों और कैसे स्वीकार किया – “मैं फिलिस्तीनी लोगों के ईमान के बारे में बात करना चाहती थी कि यह कितना मजबूत है, और वे अब भी खुदा को धन्यवाद देने को प्राथमिकता देने के लिए अपने दिलों में जगह रखते हैं, तब भी जबकि उनसे सब कुछ छीन लिया गया है।” उन्होंने आगे कहा, जितना अधिक मैंने कुरआन पढ़ा, पाठ की सामग्री उतनी ही अधिक मेरी अपनी मूल विश्वास प्रणाली के साथ जुड़ती चली गई। मुझे कुरआन उपभोक्तावाद-विरोधी, दमन-विरोधी और नारीवादी लगा।

एक महीने के भीतर, मैंने शहादह, इस्लाम अपनाने का औपचारिक कलिमा, पढ़ लिया – मेगन बी राइस

“फिलिस्तीनियों की अटूट भावना और इस्लाम के प्रति गहरी भक्ति कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है।” कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

1. “मैंने कल कुरआन पढ़ना शुरू किया और यह सुंदर है। मैं मुस्लिम नहीं हूं, लेकिन मैं फिलिस्तीन के साथ खड़ा हूं,” एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा।

2. एक अन्य व्यक्ति ने टिकटॉक पर कहा, “मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं था.. प्रॉपगंडा बहुत गहरा है… मैं शिक्षा सामग्री प्राप्त करने की कोशिश कर रहा हूं, और खुद की डीप्रोग्रामिंग कर रहा हूं।”

3. “मैंने 3 दिन पहले इस्लाम अपना लिया है और अब मैं इस्लाम के बारे में और अधिक सीख रहा हूं। कुरआन ईमान वालों के लिए उपचार और दया है,” एक अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने कहा। (मोरक्को विश्व समाचार)

4. एलजीबीटी सामग्री निर्माता ऑरोरा बर्ड अपने दर्शकों को पहली बार कुरआन पढ़ने के अनुभव के बारे में बताती है। उन्होंने एक वायरल वीडियो में कहा कि, “मैंने अभी-अभी कुरआन पढ़ना शुरू किया है और मैं इसे लेकर इतनी उत्साहित हूं कि जब लोगों ने पहली बार मुझसे पूछा तो मैं सोचती थी कि मैं इसे सिर्फ जिज्ञासावश पढ़ना चाहती हूं लेकिन अब मैं इसका अध्ययन करने के लिए इसे पढ़ना चाहती हूं। आगे कहा, मैं बस इतना जानती हूं कि यह वही है जो मैंने अभी पढ़ा है। मैं बस आपको धन्यवाद कहना चाहती थी और बताना चाहता थी कि मैं कितनी उत्साहित हूं। (Ynetnews.com)

5. एक इजरायली मां डेनिएल अलोनी ने एक पत्र में अपनी 5 वर्षीय बेटी एमिलिया की देखभाल के लिए हमास सेनानियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, ”मेरी बेटी के प्रति दिखाई गई आपकी असाधारण मानवता के लिए मैं तहे दिल से आपको धन्यवाद देती हूं। वह (एमिलिया) यह महसूस करती है कि आप सभी उसके दोस्त हैं, सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि वास्तव में प्यारे और अच्छे हैं। उन्होंने कहा, बच्चों को कैद में नहीं रखा जाना चाहिए, लेकिन आपका और रास्ते में मिले अन्य दयालु लोगों का धन्यवाद, मेरी बेटी को गाजा में एक रानी की तरह महसूस हुआ। हम जिस लंबी यात्रा पर हैं, उसमें हमें कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो उसके प्रति दयालु न रहा हो, और आपने उसके साथ दया और करुणा का व्यवहार किया है। अलोनी ने अपने पत्र को हमास के प्रति करुणा के साथ समाप्त करते हुए कहा: “गाजा में आपके द्वारा झेली गई कठिन परिस्थिति और आपको हुए गंभीर नुकसान के बावजूद दिखाए गए आपके दयालु व्यवहार को मैं याद रखूंगी।” (टीआरटी वर्ल्ड)

फिलिस्तीनियों का लचीलापन इस्लाम में वैश्विक जिज्ञासा को प्रेरित करता है

ऑब्ज़र्वर पोस्ट ने सुमैया खान द्वारा लिखित एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था, “टिकटॉकर्स गाजा पर इजरायल की बमबारी के बीच फिलिस्तीनी लचीलेपन को समझने के लिए कुरआन की ओर उन्मुख हो रहे हैं”। वह बयान करती हैं, इस प्रवृत्ति की शुरुआत @biondaxox नाम की एक यहूदी लड़की ने की थी, जिसने फिलिस्तीनी आस्था और लोगों के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा व्यक्त करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था। उनको अन्य उपभोगताओं द्वारा कुरआन पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया था जिसके बाद उन्होंने इसे पहली बार पढ़ने का अपना अनुभव साझा किया और दूसरों को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

एक अन्य उपयोगकर्ता, @astrolojay_, जो खुद को एक ईवैन्जेलिकल ईसाई कहते हैं, ने पहली बार कुरआन पढ़ा। उन्होंने कहा कि वे कुरआन की कुछ आयतों और अवधारणाओं से आश्चर्यचकित हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इस्लाम इसके पश्चिमी आख्यान से कितना अलग है।

पश्चिम में लोगों ने कुरआन पढ़ना और इस्लाम की खोज करना शुरू कर दिया है

7 अक्टूबर के बाद, कुछ लोगों ने इस घटना की तुलना 9/11 से करना शुरू कर दिया, कुरआन और इस्लाम पर चर्चा शुरू हो गई। इस संबंध में ‘द गार्जियन’ ने ज़रीन ग्रेवाल (एसोसिएट प्रोफेसर, येल यूनिवर्सिटी) का साक्षात्कार लिया जिसमें उन्होंने कहा, “9/11 के तुरंत बाद, कुरआन बेस्टसेलर बन गया, हालांकि उस समय कई अमेरिकियों ने इस्लाम के बारे में अपने पूर्वाग्रहों, जैसे कि यह स्वाभाविक रूप से एक हिंसक धर्म है, की पुष्टि करने के लिए ही इसे खरीदा था। “अंतर यह है कि इस समय, लोग हमास द्वारा 7 अक्टूबर के हमले को समझने के लिए कुरआन की ओर नहीं जा रहे हैं,” बल्कि “वे उस अविश्वसनीय लचीलेपन, विश्वास, नैतिक शक्ति और चरित्र को समझने के लिए कुरआन की ओर रुख कर रहे हैं जिसे वे मुस्लिम फ़िलिस्तीनियों में देखते हैं।”

इसी तरह, सिल्विया चान-मलिक (एसोसिएट प्रोफेसर, रटगर्स यूनिवर्सिटी) 9/11 के बाद मुसलमानों के खिलाफ घृणा अपराधों और मीडिया में इस्तेमाल की जाने वाली ज़ेनोफोबिक भाषा में वृद्धि के समय स्नातक स्कूल में थी। उन्होंने कहा, “जो कुछ हो रहा था उसमें मेरी बहुत दिलचस्पी थी, इसकी तुलना पर्ल हार्बर घटना के बाद जापानी अमेरिकियों के इतिहास से की जा रही थी।” “मैंने वास्तविक मुसलमानों से मिलकर इस पर स्वयं गौर करना शुरू किया, और जब मैंने इस्लाम पर अपना होमवर्क किया तो मैं आश्चर्यचकित रह गयी।” “मुझे इस समय टिकटॉक पर जो हो रहा था, वैसा ही अनुभव हुआ, मुझे आश्चर्य हुआ कि जिन लोगों से मैं मिली, वे मुस्लिम थे, और जो मैंने समाचारों में सुना था, उससे इतने अलग क्यों थे। मैंने लोकप्रिय धारणा और सच्चाई के बीच इतना बड़ा अंतर कभी अनुभव नहीं किया था” उन्होंने आगे कहा।

इस्लाम को जितना दबाओगे, लोग उतना ही इसे स्वीकार करेंगे।

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