गोधरा की साबरमती ऐक्सप्रैस से जे एन यू के साबरमती हॉस्टल तक

हैरत की बात ये है कि जिन तसावीर को देखकर वजीरे ख़ारिजा और वजीरे ख़जाना परेशान हैं उनको वजीरे आजम नहीं देख रहे हैं या अगर देख भी रहे हैं तो मोनी बाबा बने अपने इजतिरार का इजहार नहीं कर रहे हैं। वो कम-अज-कम अपने पुराने मगरमच्छ के आंसू बहाते हुए कह सकते थे मारना है तो मुझे मारो मगर इन बेक़सूर तलबा को बखश दो। लेकिन शायद आगे चल कर जिनको दहश्तगर्द करार देना है उनसे हमदर्दी का इजहार करके अपने भक्तों को नाराज करने का ख़तरा वो मोल लेना नहीं चाहते।

0
685

डाक्टर सलीम खान..
जामिआ मिल्लिया इस्लामिया की तर्ज पर जे एन यू में होने वाले हमले का इल्जाम भी भाजपा की परवर्दा एबीवीपी के गुंडों पर लगाया जा रहा है। हमलावरों ने साबरमती हॉस्टल में घुस कर तलबा व तालिबात को तशद्दुद का निशाना बनाया । सू-ए इत्तिफाक से गोधरा में जिस ट्रेन की आग का बहाना बनाकर सारे गुजरात को नजरे आतिश किया गया था उस का नाम भी साबरमती एक्सप्रेस था। ऐनी शाहिदीन के मुताबिक जे एन यू में 50 से ज्यादा नकाब पोश हमलावरों ने डंडों और लाठियों के साथ दाखिल हो कर तलबा की पिटाई की। यूनीयन प्रेसीडेंट आयशी समेत 15 जखमी तलबा को सात एम्बूलैंस में एम्स ले जाना पड़ा। हमले के दौरान जे एन यू तलबा यूनीयन की प्रेसीडेंट वीडीयो में ये कहती हुई नजर आईं कि ‘‘मुझ पर सफ्फाकाना अंदाज में हमला किया गया है। हमलावर नकाब पोश थे। देखो खून कैसे निकल रहा है। मुझे बुरी तरह निशाना बनाया गया है।’’
ये हुस्ने इत्तिफाक़ है कि फिलहाल देश की वजीरे ख़जाना निर्मला सीता रामन और वजीरे ख़ारिजा जय शंकर जे एन यू के तलबा रहे हैं। इन दोनों को फौरन जे एन यू जाना चाहिए था या कम-अज-कम एम्स जाकर जखमियों से मुलाकात करनी चाहिए थी मगर अफसोस कि मोदी और शाह की नाराजगी के डर से ये बेचारे ऐसा नहीं कर सके। सीता रामन ने ट्वीट किया ‘‘जे एन यू से भयानक तसावीर, वो मुकाम जिसको मैं जानती और याद करती हूं, जहां गरमागर्म बहस तो होती थी लेकिन कभी भी तशद्दुद नहीं होता था । मैं इसकी मजम्मत करती हूं । ये हुकूमत यूनीवर्सिटी और कॉलिजों को तमाम तलबा के लिए महफूज मकाम बनाना चाहती है। ये बयान वजीरे ख़जाना के देने का नहीं है इसलिए कि नज्म व जब्त क़ायम करना वजीरे दाखिला की जिम्मेदारी है, लेकिन अगर वो अपनी जिम्मेदारी अदा करते तो ऐसा नहीं होता । भाजपा जिस तरह गुंडों की पुश्तपनाही कर रही है इसका नतीजा है कि ये आग बनारस हिंदू यूनीवर्सिटी से अलीगढ मुस्लिम यूनीवर्सिटी पहुंची और अब जामिया से होते हुए जे एन यू तक पहुंच गई है। इसकी तपिश अब सारे हिन्दुस्तान में महसूस की जाएगी।
वजीरे ख़ारिजा ने भी अपने ट्वीट में लिखा है कि जो कुछ जे एन यू में हो रहा है में उसकी तसावीर देख रहा हूं । मैं तशद्दुद की मजम्मत करता हूं । ये यूनीवर्सिटी की तहजीब व रिवायत के पूरी तरह खिलाफ है। जय शंकर की बात दरुस्त है कि ये इस तहजीब व रिवायत के खिलाफ है, जिसमें उन्होंने तालीम हासिल की थी। अब जमाना बदल गया है। देश तेजी के साथ हिंदू राष्ट्र बन रहा है और देश के ताबनाक मुस्तक़बिल की ये तसावीर हैं जो क़ब्ल अज वक्त सामने आ रही हैं । ये तो बस एक झांकी है पूरी पिक्चर बाकी है।
हैरत की बात ये है कि जिन तसावीर को देखकर वजीरे ख़ारिजा और वजीरे ख़जाना परेशान हैं उनको वजीरे आजम नहीं देख रहे हैं या अगर देख भी रहे हैं तो मोनी बाबा बने अपने इजतिरार का इजहार नहीं कर रहे हैं। वो कम-अज-कम अपने पुराने मगरमच्छ के आंसू बहाते हुए कह सकते थे मारना है तो मुझे मारो मगर इन बेक़सूर तलबा को बखश दो। लेकिन शायद आगे चल कर जिनको दहश्तगर्द करार देना है उनसे हमदर्दी का इजहार करके अपने भक्तों को नाराज करने का ख़तरा वो मोल लेना नहीं चाहते।
राहुल गांधी ने इस बुजदिलाना हमले को फिस्ताईयत का शाखसाना करार दिया तो चिदम्बरम ने पुलिस कमिशनर को कटहरे में खड़ा किया । यचूरी ने भाजपा और आराएस उसके खिलाफ कमर कसी तो केजरीवाल ने अमन की दुहाई दी । अखिलेश यादव ने आला सतह की अदालती तफतीश का मुतालबा किया यही मुतालबा भाजपा के तर्जुमान ने भी किया लेकिन इस तफतीश का क्या नतीजा होगा उस का अंदाजा उनके बयान की तफसील से लगाया जा सकता है। भाजपा के तर्जुमान नलिन कोहली ने कहा हर किस्म का तशद्दुद काबिले मजम्मत है मगर लेकिन ये बात याद रखना चाहिए कि जे एन यू में ऐसी जेहनीयत के हामिल तलबा मौजूद हैं जो देश के टुकड़े करना चाहते हैं और सुप्रीमकोर्ट के जरिये दहश्तगर्द को दी जाने वाली सजा को कत्ल गरदानते हैं । उनको आम तौर पर टुकड़े टुकड़े गैंग कहा जाता है। जाहिर है उनके नजरिया को अमन का अलमबरदार नहीं कहा जा सकता। इस बात की तफतीश होनी चाहिए कि इन लोगों का तशद्दुद की तहजीब के फरोग और इस वाकिया में क्या किरदार है।
वजीरे दाखिला अमित शाह ने इस तशद्दुद की मजम्मत करने के बजाय पुलिस अफसरों को तफतीश करने की तलकीन पर इकतिफा किया है। इस तफतीश का मुतवक्के रिपोर्ट मुल्क जानता है। मुम्किन है ये बताया जाये कि जिस तरह जामिया में तशद्दुद करने वाले बंगलादेशी थे इसी तरह जे एन यू के हमलावर नेपाल से आए थे इसलिए कि वहां इश्तिराकियों की हुकूमत है। उनका मकसद एबीवीपी को निशाना बनाना था मगर गलती से उन्होंने अपने ही लोगों पर हमला कर दिया। बईद नहीं कि उनकी नाराजगी की वजह ये बताई जाये कि नेपाल को सी ए ए में शामिल नहीं किया गया है इसलिए वो नाराज हैं । इस तरह की ऊटपटांग बात कोई जी-शुऊर हुकूमत नहीं कह सकती मगर मोदी है तो है और गोदी मीडीया के चलते तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।
कौमी इंतिखाब में अवाम ने वजीर आजम नरेंद्र मोदी के नारा ‘‘ये मोदी का हिन्दुस्तान है, घर में घुस कर मारेंगे’’ को सुना तो ऐसे ख़ुश हुए कि उन्हें दुबारा चैकीदार बना दिया । अब चैकीदारी का ये आलम है कि घर के अंदर घुस कर गुंडे मकान मालिकों को मार रहे हैं और प्रधान सेवक कुंभकर्ण की नींद सो रहा है वर्ना राजधानी के अंदर जामिया के बाद जे एन यू में ये तशद्दुद के वाकियात नहीं होते। वजीरे आजम ने चूंकि मुजाहिरीन को लिबास से पहचान लेने की धमकी दी थी इसलिए हमलावर नक़ाब ओढ़ कर आए हालांकि उन्हें उस की जरूरत नहीं थी। वो अपने माथे पर तिलक सजा कर आते तब भी उनका बाल बीका नहीं होता क्योंकि योगी जी अगर इंतिकाम ले सकते हैं तो मोदी जी क्यों नहीं ले सकते ? योगी पर इल्जाम लगाया जा रहा है कि उन्हों ने उत्तरप्रदेश को गुजरात बना दिया लेकिन शाह जी ने तो दिल्ली को अहमदाबाद में तब्दील कर दिया । वैसे हकीकत ये है कि जाफरानी गुंडा अनासिर खूद अपनी ही कब्र खोद रहे हैं । बहुत जल्द दिल्ली का इंतिखाब हारने के बाद कफे अफसोस मिलते हुए भाजपा को ये कहना पड़ेगा
‘‘इस घर को आग लग गई घर के चिराग से।’’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here