भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पर क्या है दिल्ली के युवाओं की राय

ये राजनीतिक तनाव है जिसका फायदा स्वाभाविक रूप से राजनैतिक पार्टियों को ही मिलेगा. हम चाहते हैं की युद्ध का राजनीतिकरण न हो.

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पिछले कुछ दिनों से भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में देश के युवाओं का क्या सोचना है ये जानने के लिए छात्र विमर्श ने दिल्ली में युवाओं और छात्रों से बात की गई.

छात्रों व युवाओं से बात करने पर हमें अलग अलग राय मिली. अधिकतर छात्र युद्ध के समर्थन में नहीं थे लेकिन कुछ पकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने की बात कर रहे थे. कुछ छात्र प्रधानममंत्री नरेंद्र मोदी को दूरदर्शी नेता के रूप में मानते हुए उनके समर्थन में थे तो कुछ ने कहा की मोदी की राजनीतिक अपरिपक्वता के कारण ये तनाव की स्थिती पैदा हुई है. आइये जानते हैं उनकी राय:

जंग से दोनों देशों का नुकसान होगा, आम इंसानों की मौत होगी:

जामिया की छात्रा हिना कहती हैं की युद्ध मसलों का हल नहीं है. शांति स्थापित करने के लिए और आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए दोनों देशों को साथ मिलकर काम करना होगा.

युद्ध कभी मानवजाती का भला नहीं करता इसलिए युद्ध से दोनों देशों को बचना चाहिए. हिन्दुस्तान के जो परिवार बॉर्डर के करीब हैं वो सबसे ज़्यादा जंग से प्रभावित होंगें. उनका व्यापार, बच्चों का स्कूल और रोजगार सब प्रभावित होगा. सीमा के दोनों तरफ़ जवान मारे जाएंगें और न जाने कितने बच्चे यतीम और माएं बेवा हो जायेंगी.

अर्श इस्लाम का कहना है कि जंग जज़बाती क़दम होता है, जंग से आम इन्सान को नुकसान होगा. जंग से चुनाव जीता जा सकता है लेकिन इस से आतंकवाद का ख़ात्मा कभी नही हो सकता.

अभिषेक त्रिपाठी जो कि पत्रकारिता के छात्र हैं, कहते हैं की हमें मोदी जी की क्षमता पर पूरा भरोसा है की वो देश को सही दिशा में ले जा रहे हैं. जंग नहीं होनी चाहिए लेकिन दुश्मन भी हमें कमज़ोर न समझे.

 

ये तनाव राजनीति से प्रेरित है:

हिना का ये भी कहना है कि ये जो तनाव की स्थिती है वो यूँहीं नहीं बनी है बल्कि ये राजनीति से प्रेरित है. दोनों देशों की सरकार युद्ध को चुनाव में कैश कराएगी लेकिन जो जवान दोनों तरफ़ से मारे जाएंगें उनका हिसाब कौन देगा?ये राजनीतिक तनाव है जिसका फायदा स्वाभाविक रूप से राजनैतिक पार्टियों को ही मिलेगा. हम चाहते हैं की युद्ध का राजनीतिकरण न हो.

 

अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा:

छात्रों और युवाओं का ये भी कहना था की जंग में दोनों तरफ़ जान का नुक्सान तो होगा ही साथ ही जंग से शेयर मार्केट डाउन हो जायेगा. सीमा पर सिर्फ़ एक दिन के तनाव में हमने ये देख भी लिया है. अगर जंग हुई तो पूरी अर्थव्यवस्था बिखर के रह जाएगी. लोगों के व्यापार पर इसका असर पड़ेगा.  

 

जंग के बाद हालात बत्तर हो जाते हैं:

सऊद अहमद, जंग के बाद के हालात का ज़िक्र करते हुए कहते हैं की जंग के बाद हालात बहुत बुरे हो जायेंगे जिस से उबरने में कई साल लग जाएंगें. देश की सरकार को चाहिए की हमारे देश के पाइलट को सही सलामत वापस लाने का रास्ता बनाए न कि राजनीतिक रैलियों को सम्बोधित करें. ये सही नहीं लगता. शेयर मार्केट डाउन हो गया है सिर्फ़ एक दिन के तनाव में.

 

मीडिया प्रायोजित तनाव है:

कुछ छात्रों का कहना था कि मीडिया भी जंग की स्थिति पैदा करने में मुख्य भूमिका निभा रहा है. सीमा पर और दोनों देशों के वार रूम में जितना तनाव है उस से ज़्यादा तनाव दोनों देशों की मीडिया के न्यूज़ रूम में है. जंग में ये मीडिया हॉउस अपनी TRP बढ़ाएंगे.  

सीमी कहती हैं कि ये राजनीतिक प्रोपगंडा है और मीडिया के द्वारा खड़ा किया गया है जो राजनीति से प्रेरित है. हम कभी भी जंग का समर्थन नहीं करते. सउद अहमद का कहना था की भाजपा को अपनी रैलियां कैंसिल करनी चाहिए और भारतीय वायू सेना के जवान अभिनन्दन की भारत वापसी को सुनिश्चित बनाए जाने की पहल करनी चाहिए.

आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए दोनों देशों को साथ आना चाहिए:

सिमी, जो की जामिया की छात्रा हैं, का यह भी कहना है कि दोनों देशों को मिलकर बात करनी चाहिए और आतंकवाद के खात्में के लिए साथ मिलकर लड़ना चाहिए. ये तभी संभव होगा जब दोनों देशों के शीर्ष नेता साथ बैठेगें और शांति स्थापित करने की ओर क़दम बढ़ाएंगें. 
देश के छात्र व युवा तो युद्ध नहीं चाहते लेकिन इन सबके बीच देखना ये है की दोनों देशों के रहनुमा क्या चाहते हैं.  

रिपोर्ट :  अज़हर अंसार

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