कविता – “हे शूद्र!”

लो पैर तुम्हारे साफ हो गये अब चप्पलों की जरूरत नहीं तुम्हे तुम उतर सकते हो सीवर मे बे फिक्र तुम मरोगे नहीं, तुम्हे निर्वाण मिलेगा अब सीधा स्वर्ग...

दर्पण

टीवी ऑन करने पर बहुत सा शोर टकराता है कानों से । कोई एक खेल खेला जा रहा है । इधर एक एंकर सीटी बजाता है उधर आरोप प्रत्यारोप...

[दर्पण] युद्ध और शांति

उन्होंने नहीं देखा है अभी बस्तियों को उजड़ते हुए लोगों को कराहते हुए गिद्धों को लाशें नोचते हुए और शहरों को श्मशान बनते हुए उन्होंने नहीं सुना है अभी किसी...

[दर्पण] कितना अच्छा होता

कितना अच्छा होता, निकाल लेते सारा पोटेशियम नाइट्रेट बारूद से, और ज़्यादा बना सकते थे उर्वरक, पिघला देते हथियारों का सारा लोहा, और अधिक बना सकते थे हल, निकाल...

[कविता] तब क़लम उठानी पड़ती है

मानवता जब दम तोड़ रही हो, सांसें साथ छोड़ रही हों, तब क़लम उठानी पड़ती है, क्रांति की मशाल जलानी पड़ती है। देश के सारे मुद्दे...

चिनार का दर्द

एक नन्हा सा पौधा जिसे जवान होने में सदियां लगी थीं। जिसने पता नहीं कितनी तूफानी बर्फीली हवाओं से लड़कर अपने वजूद को जिंदा रखा...

तरकीब (लघुकथा)

आज रविवार था, सुबह 8 बजे कोचिंग में वीकली टेस्ट और 30% मार्क्स के साथ सैफ़, बैच का सबसे कम नम्बर प्राप्त करने वाला...

भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

शारिक़ अंसर, नई दिल्ली आज़ादी हासिल करने में और भारत जैसे बहुसंख्यक, बहुभाषीय व बहुसांस्कृतिक समाज को बांधे रखने और उसे नई दिशा देने में...

सैर के वास्ते थोड़ी सी जगह और सही !

Druv Gupt ✒️..... दिल्ली के निज़ामुद्दीन में मौज़ूद मिर्ज़ा ग़ालिब की मज़ार दिल्ली की मेरी सबसे प्रिय जगह है। वहां की बेशुमार भीड़भाड़ में जब भी...

स्व. भिखारी ठाकुर की जयंती रंगवा में भंगवा परल हो बटोहिया !

Dhruv Gupt लोकभाषा भोजपुरी की साहित्य-संपदा की जब चर्चा होती है तो सबसे पहले जो नाम सामने आता है, वह है स्व भिखारी ठाकुर का।...