तरकीब (लघुकथा)

आज रविवार था, सुबह 8 बजे कोचिंग में वीकली टेस्ट और 30% मार्क्स के साथ सैफ़, बैच का सबसे कम नम्बर प्राप्त करने वाला...

लघु कथा! तजुर्बा

मेट्रो में एक बुजुर्ग महिला बैठी हैं... साथ उनकी बेटी है... दोनों भोजपुरी में बातें कर रही हैं... बातों का टॉपिक गाँव का कोई...

स्व. भिखारी ठाकुर की जयंती रंगवा में भंगवा परल हो बटोहिया !

Dhruv Gupt लोकभाषा भोजपुरी की साहित्य-संपदा की जब चर्चा होती है तो सबसे पहले जो नाम सामने आता है, वह है स्व भिखारी ठाकुर का।...

कविता-किताबें खोलता हूँ

किताबें खोलता हूँ, सैकड़ों पन्ने पलटता हूँ, हज़ारों लफ्ज़ मिलते हैं, सभी खामोश दिखते हैं, यूंही बिखरे पड़े हैं सब, क़लम ने क़ैद कर रख्खा है इनको, किताबों के क़िले...

कविता-साम्राज्य हमेशा से दयालू रहा है

साम्राज्य हमेशा से दयालू रहा है जब हम अंधकार में थे पश्चिमी साम्राज्य ने हम पर दया दृष्टि डाली हमें सभ्य बनाया उसने हमें लूटा नहीं, ना ग़ुलाम...

दर्पण

टीवी ऑन करने पर बहुत सा शोर टकराता है कानों से । कोई एक खेल खेला जा रहा है । इधर एक एंकर सीटी बजाता है उधर आरोप प्रत्यारोप...

ख़ामोश आंखे (कविता)

दर्द में डूबी खामोश आंखे ठहर ठहर कर चलती सांसे घटती रहती घटनाए मासूम रक्त को बहाए खूंखार दिलो को फिर भी शर्म न आए कुछ न करे कोई कुछ न...

कविता : हम सरकार हैं,ज़ुबान बंद रखो

हम सरकार हैं... हम सरदार है हमारा हुक्म सर्वोपरि है ज़ुबान बंद रखो आंखे मूंद लो तुम्हारी बुद्धि तुम्हारा विवेक तुम्हारा त्याग तुच्छ हैं हमारी शान के आगे तुम्हारा दर्द तुम्हारे आंसू तुम्हारी शंकाएं ज़िन्दगी और मौत कुछ...

सैर के वास्ते थोड़ी सी जगह और सही !

Druv Gupt ✒️..... दिल्ली के निज़ामुद्दीन में मौज़ूद मिर्ज़ा ग़ालिब की मज़ार दिल्ली की मेरी सबसे प्रिय जगह है। वहां की बेशुमार भीड़भाड़ में जब भी...

वह सुबह ज़रूर आएगी! डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती विशेष

मैं हुं न्याय, दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जो सुबह से लेकर शाम तक में मुझे याद न करे। सब लोग मुझसे इतना...