साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में छात्रों का उत्पीड़न जारी

छात्रवृत्ति बढ़ाने की माँग को लेकर अक्टूबर 2022 में हुई एक हड़ताल में शामिल होने के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा पाँच छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई थी, जिनमें से एक छात्र अम्मार अहमद की हालत बिगड़ गई थी। अम्मार को हार्ट अटैक आया था। उनकी हालत अभी भी नाज़ुक बनी हुई है और वह Body Paralysis का शिकार हैं। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी का हठधर्मितापूर्ण रवैया बरक़रार है और अभी भी छात्रों को निष्कासित करने का सिलसिला चल रहा है।

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साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में छात्रों का उत्पीड़न जारी

संदीप पांडेय

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (SAU), दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के सदस्य देशों – भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, अफ़ग़ानिस्तान और मालदीव द्वारा दिल्ली में स्थापित एक विश्वविद्यालय है – जो इन सभी देशों के छात्रों के लिए है। हालांकि, जैसा कि SAARC इन दिनों क्षेत्रीय राजनीतिक गतिशीलता के कारण बहुत कम ध्यान आकर्षित कर पा रहा है, ऐसा प्रतीत होता है जैसे इस यूनिवर्सिटी ने भी अपना महत्व खो दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया में अंतराल के कारण, इस यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स भी निष्क्रिय हैं।

अक्टूबर 2022 में इस यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कुछ मुद्दों को लेकर हड़ताल शुरू की। उनकी माँगें थीं कि (1) परास्नातक छात्रवृत्ति में 2,000 रुपये की वृद्धि हो (यूनिवर्सिटी ने इसे 5,000 से घटाकर 4,000 रुपये प्रति माह कर दिया था), (2) पीएचडी छात्रवृत्ति को यूजीसी की जूनियर रिसर्च फ़ेलोशिप के समान किया जाए, (3) यूजीसी के निर्देशानुसार कोविड को ध्यान में रखते हुए पीएचडी छात्रों हेतु समयावधि को बढ़ाया जाए, और (4) संस्थागत शिकायत निवारण और अन्य समितियों में छात्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

जब प्रशासन ने इन छात्रों और उनकी माँगों पर कोई ध्यान नहीं दिया तो छात्रों ने प्रशासनिक ब्लॉक पर धरना देने का फ़ैसला किया और लगभग एक महीने तक वहां रहे। यह अविश्वसनीय है कि ये छात्र देश की राजधानी के चाणक्यपुरी इलाक़े में स्थित अकबर भवन की चौथी मंज़िल पर लगातार बैठे रहे, जो इलाक़ा अधिकांश विदेशी दूतावासों के लिए जाना जाता है, और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से बात किए बिना ऐसा होने दिया। इससे आगे बढ़कर, उन्होंने छात्रों को डराने के लिए पुलिस बल को भी बुला लिया।

लगभग 150 विरोध करने वाले छात्रों में से यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पांच छात्रों के ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई करने का फ़ैसला किया। उमेश जोशी और साहिल कुमार सिंह का नाम विश्वविद्यालय से ख़ारिज कर दिया गया, अम्मार अहमद और भीमराज एम. को निष्कासित किया गया और बांग्लादेश निवासी एकमात्र ग़ैर-भारतीय छात्र सुदीप्तो दास को, बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए,‌ निलंबित कर दिया गया। उपरोक्त पांचों छात्रों को 4 नवंबर को हॉस्टल के कमरे ख़ाली करने को कहा गया। उमेश जोशी ने 16 नवंबर को एक बैठक में अम्मार की मानसिक स्थिति के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को सूचित किया, लेकिन फिर भी प्रॉक्टर 16, 17 और 18 नवंबर को छात्रों की मानसिक पीड़ा को बढ़ाते हुए लगातार नोटिस भेजते रहे।

21 नवंबर को अम्मार को एक और नोटिस मिला जिसमें कहा गया था कि छात्रावास ख़ाली करने के पिछले आदेशों का पालन न करने पर गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने उसी रात कार्यवाहक रजिस्ट्रार से मुलाक़ात की और उनके सामने अपनी प्रतिकूल पारिवारिक स्थिति, पिता की मनोवैज्ञानिक समस्याओं और यूनिवर्सिटी से डिग्री उनके लिए महत्वपूर्ण क्यों है, के बारे में अवगत कराया लेकिन उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति देने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। 22 नवंबर को अम्मार ने यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष को एक ई-मेल भेजा, जिसमें उन्होंने छात्रों के सामूहिक हितों के लिए विरोध करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार के प्रयोग के दौरान प्रशासन को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया। उन्होंने अपने निष्कासन आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया क्योंकि कुछ दिनों में परीक्षाएं थीं और वे अपने शैक्षणिक भविष्य को लेकर चिंतित थे। रजिस्ट्रार ने यूनिवर्सिटी द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताए बिना इस ई-मेल की प्राप्ति को केवल ‘स्वीकार’ कर लिया।

यूनिवर्सिटी द्वारा लिखित बातचीत में यह कहा जाता रहा कि प्रशासन द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड और SAARC अंतर-सरकारी समझौते, नियमों, विनियमों और उपनियमों के आधार पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी, यह निर्दिष्ट किए बिना कि इन छात्रों का क़ुसूर क्या था! 22 नवंबर को ही छात्रों की एक बैठक के निमंत्रण के जवाब में अम्मार ने कहा था कि वह नहीं आ सकेंगे क्योंकि वह अंधेरे में हैं और कहा कि अब उनका भविष्य उनके साथियों के हाथों में है और उनसे प्रार्थना में उन्हें याद रखने का अनुरोध किया। ‘Noone’s beloved Ammar’ कहते हुए उन्होंने साइन ऑफ़ किया। एक और व्हाट्सएप मैसेज ‘Wanna grow old together?’ के जवाब में अम्मार ने कहा था ‘Actually, I’m planning on dying young.’

उसी रात‌ दवाओं के अत्यधिक सेवन की वजह से सुबह-सुबह अम्मार को दौरे पड़ने लगे‌ और हार्ट अटैक आया। उन्हें Primus Super Specialty Hospital में भर्ती कराया गया जहां वह Tetrahydrocannabinol (Marijuana) and Oxazepam (Benzodiazepine) के लिए पॉज़िटिव पाए गए। पहली बार किसी दबाव में यूनिवर्सिटी ने उनके निष्कासन आदेश को निलंबन में बदला, लेकिन अस्पताल में बेहोश पड़े छात्र को भविष्य में ऐसा करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देना जारी रखा और कहा कि वह इसके लिए स्वयं ज़िम्मेदार होगा। यूनिवर्सिटी ने 1,50,000 रुपये की बीमा सीमा से ऊपर के अस्पताल के इलाज के ख़र्च को वहन करने के लिए सहमति जताई लेकिन बीमाकर्ता Star Health Insurance Pvt. Ltd. यह कहते हुए पीछे हट गया कि रोगी द्वारा नशीली दवाओं के दुरुपयोग का इतिहास था और यह कि self-inflicted conditions और उनके complications उनकी नीति के तहत शामिल नहीं हैं। यूनिवर्सिटी ने भी बीमा कंपनी द्वारा दावे की अस्वीकृति पर कोई क़ानूनी भुगतान करने से मना कर दिया। 4 लाख रुपये का एक व्यक्तिगत भुगतान विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष वेणुगोपाल सेंथिल द्वारा किया गया लेकिन जब यूनिवर्सिटी के वीपी और रजिस्ट्रार अस्पताल में अम्मार से मिलने गए, तो उन्हें एक और मिर्गी का दौरा पड़ा और उनकी स्थिति बिगड़ने लगी।

इस बीच, अम्मार को AIIMS में रेफ़र कर दिया गया, लेकिन वहां बेड न मिलने के कारण उन्हें अल-शिफ़ा अस्पताल ले जाया गया और फिर आर्थिक कारणों के चलते देखभाल के लिए घर लेकर जाया गया, लेकिन अम्मार की अस्तित्व के लिए लड़ाई जारी है। उनके सहयोगी उनके इलाज के ख़र्च को पूरा करने के लिए क्राउड फ़ंडिंग के ज़रिए फ़ंड जुटा रहे हैं। यूनिवर्सिटी को उसके स्थायी स्थान, मैदान गढ़ी, में स्थानांतरित करने के कारण छात्रों का आंदोलन भी प्रभावित हुआ है। यूनिवर्सिटी दो छात्रों की सज़ा कम करने की बात से मुकर गई है और 25 नवंबर को उमेश जोशी और भीमराज एम. को फिर से निष्कासित कर दिया गया है।

बड़ा सवाल यह है कि क्या अम्मार की ऐसी स्थिति ख़ुद हुई है या SAU की हठधर्मिता, अहंकार और स्थिति को पूरी तरह ग़लत तरीक़े से संभालने के कारण हुई है। विश्वविद्यालय ने न केवल छात्रों के अकादमिक करियर को नुक़सान पहुंचाया है बल्कि एक छात्र के जीवन को भी ख़तरे में डाल दिया है। छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों को संबोधित करने और उनसे संवाद करने के बजाय वे पांचों छात्रों द्वारा छात्रावास ख़ाली करने के लिए बार-बार नोटिस जारी करके उनके मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने में व्यस्त थे। उन्होंने पांच फ़ैकल्टी सदस्यों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया, जो कैंपस में पुलिस को बुलाने और पांच छात्रों के ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करने से असहमत थे। ऐसा प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय को छात्रों के मुद्दों को हल करने के बजाय उन्हें बाहर निकालने में अधिक दिलचस्पी थी। निष्कासित दो छात्रों को फिर से विश्वविद्यालय के नए परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। अध्यक्ष से लेकर प्रॉक्टर तक यूनिवर्सिटी के पूरे प्रशासन को अम्मार अहमद के साथ जो हुआ है उसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और अगर विश्वविद्यालय और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि SAARC की भावना को बचाए रखना है तो उन्हें इस्तीफ़ा देकर अधिक संवेदनशील लोगों के लिए रास्ता छोड़ना चाहिए। हम SAU को पूरे दक्षिण एशिया और उसके बाहर के छात्रों के लिए एक स्वागत योग्य स्थान के रूप में फलते-फूलते देखना चाहते हैं। दुःख की बात है कि अम्मार के साथ जो हुआ, ऐसी घटनाएं संभावित मेधावी छात्रों के हौसले पस्त कर देंगी।

(संदीप पांडेय सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के महासचिव हैं।)

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