कर्नाटक हिजाब विवाद: क्या है पूरा मामला?

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भारत जैसे धर्म प्रधान देश में एक ओर संविधान द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की बात और दूसरी ओर धर्म विशेष के प्रति तेज़ी से फैलती नफ़रत के बीच झलकती वास्तविकता प्रायः परस्पर टकराने लगती है।

इसका उदाहरण उडुपी (कर्नाटक) के प्री यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेज के दरवाज़े पर बैठी 6 मुस्लिम लड़कियां हैं जिन्हें केवल उनके हिजाब (हेड स्कार्फ़) के कारण कॉलेज में जाने की विगत एक महीने से अनुमति नहीं दी जा रही है।

इसी श्रृंखला में हाल ही में उडुपी के ही कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनकर पहुंची छात्राओं को कॉलेज प्रशासन ने रोक दिया, जिसके कारण लगभग 40 छात्राएं भंडारकर आर्ट एंड साइंस डिग्री कॉलेज के गेट पर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। स्तिथि उस समय से और गंभीर हो गई है जब हिजाब के विरोध में 100 हिंदू छात्र/छात्राएं भगवा चोला पहनकर कॉलेज में आ गए थे।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज की एक निर्देश पुस्तिका कहती है कि छात्राओं को परिसर के अंदर स्कार्फ़ पहनने की अनुमति है। हालांकि स्कार्फ़ का रंग दुपट्टे से मेल खाना चाहिए और किसी भी छात्रा को कॉलेज परिसर के अलावा कैंटीन में कोई अन्य कपड़ा पहनने की अनुमति नहीं है। अपने इस संवैधानिक अधिकार को ले कर छात्राएं धरने पर बैठ गईं और भंडारकर कॉलेज के ही कुछ लोग उनके समर्थन में आ गए।

एक छात्रा ने कहा कि, “हिजाब हमारी ज़िंदगी का हिस्सा है। हमारे सीनियर्स उसी कॉलेज में हिजाब पहनकर पढ़ते थे। अचानक यह नया नियम कैसे लागू हो गया? हिजाब पहनने से क्या दिक्कत है? कुछ समय पहले तक इसे लेकर कोई समस्या नहीं थी।”

इसके पश्चात कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं के परिजनों के साथ एक मीटिंग भी की लेकिन समस्या का हल नहीं निकल सका और छात्राओं को हिजाब के साथ कॉलेज में आने की अनुमति नहीं दी गई। कुंडापुर के दो, चिकमंगलूर के एक कॉलेज के बाद अब बीते बुधवार यानि 2 फ़रवरी को शिवमोगा के भद्रावती में सर एमवी शासकीय कॉलेज के छात्रों ने भी कक्षा में हिजाब पहनने वाली छात्राओं का विरोध किया।

ज्ञात रहे कि दिसंबर के आख़िरी हफ़्ते में जब उडुपी के गर्ल्स प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज में 6 छात्राओं ने हिजाब पहनना शुरू किया तो कॉलेज प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि छात्राएं कॉलेज परिसर में तो हिजाब पहन सकती हैं लेकिन उन्हें हिजाब के साथ कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी। 17 फ़रवरी से कॉलेज में परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। कक्षा में बैठने पर प्रतिबंध लगने के कारण छात्राओं ने विरोध किया तो उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होने का विकल्प दिया गया। उसके बाद एक छात्रा ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके कक्षा के भीतर हिजाब पहनने का अधिकार दिए जाने का अनुरोध किया है। याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि हिजाब (सिर पर दुपट्टा) पहनना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत एक मौलिक अधिकार है और यह इस्लाम की एक अनिवार्य प्रथा है।

हिजाब धारण करने वाली छात्राओं में से एक ने बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में कहा था कि, “जब हम लोग हिजाब पहन रहे हैं तो हम लोग शांतपूर्ण तरीक़े से बात रहे हैं। मुझे लगता है ये मामला जो साम्प्रदायिक हुआ उसका कारण MLA रघुपति भट्ट (जो कि कॉलेज विकास समिति के अध्यक्ष भी हैं) द्वारा एक मीटिंग में कही गई ये बात थी कि यदि आज आपके बच्चे हिजाब पहन कर आयेंगे तो कल को हमारे बच्चे भगवा शॉल पहन कर आएंगे, तब हम लोग क्या करेंगे? तब हमारे कॉलेज का अनुशासन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।”

छात्रा ने बताया कि अगले ही दिन चिकमंगलूर ज़िले के बालागाड़ी राजकीय डिग्री कॉलेज में कुछ छात्र भगवा शॉल पहन कर कॉलेज आ गए थे। ज्ञात रहे कि ये दोनों घटनाएं जनवरी के आरंभ हुई थीं जिसके बाद चिकमंगलूर के उस कॉलेज में हिजाब और भगवा शॉल दोनों पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया था।

कर्नाटक सरकार ने इस मुद्दे को हल करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। समिति की सिफ़ारिश आने तक सभी लड़कियों को वर्तमान में लागू यूनिफ़ॉर्म संबंधी नियमों का पालन करने को कहा गया है।

इस मामले में ताज़ा अपडेट यह है कि प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज, कुंडापुरा के परिसर में सोमवार यानि सात फ़रवरी को हिजाब धारण करने वाली छात्राओं को परिसर में प्रवेश की अनुमति दे दी गई है। हालांकि यह कहा गया है कि उन्हें अलग कक्षाओं में पढ़ाया जाएगा।

(ज्ञात रहे कि ये मुस्लिम छात्राएं हिजाब को अपने परिधान का अनिवार्य हिस्सा मानती हैं और न केवल कॉलेज बल्कि हर जगह इसे धारण करती हैं।)

– तूबा हयात ख़ान

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