वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में 11 पायदान लुढ़क कर 161वें स्थान पर पहुंचा भारत

रिपोर्ट के मुताबिक़, 2023 के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत पिछले साल की तुलना में 11 पायदान गिरकर 161 वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल 180 देशों की सूची में भारत को 150 वां स्थान दिया गया था। इंडेक्स के मुताबिक़ अब भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से भी कई पायदान पीछे है। इन दोनों देशों की रैकिंग में सुधार हुआ है और ये क्रमशः 150 और 152 वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

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वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में 11 पायदान लुढ़क कर 161वें स्थान पर पहुंचा भारत

रिपोर्ट

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बुधवार (3 मई) को वैश्विक मीडिया निगरानी संस्था ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की। फ्रांस आधारित यह संस्था दुनिया भर के देशों में प्रेस की स्वतंत्रता पर हर वर्ष रिपोर्ट प्रकाशित करती है। इस रिपोर्ट में विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की स्थिति पर चिंता जताई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, 2023 के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत पिछले साल की तुलना में 11 पायदान गिरकर 161 वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल 180 देशों की सूची में भारत को 150 वां स्थान दिया गया था। इंडेक्स के मुताबिक़ अब भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से भी कई पायदान पीछे है। इन दोनों देशों की रैकिंग में सुधार हुआ है और ये क्रमशः 150 और 152 वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

भारत के बाद वाली रैकिंग में बांग्लादेश (163 वां स्थान), तुर्की (165 वां स्थान), सऊदी अरब (170 वां स्थान) और ईरान (177 वां स्थान) जैसे देश शामिल हैं। चीन और उत्तर कोरिया क्रमशः 179 और 180 वें नंबर के साथ अंतिम दो पायदानों पर हैं।

इस रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया यूज़र्स, पत्रकारों और नेताओं की तरफ़ से लगातार टिप्पणियां की जा रही हैं। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश लिखते हैं,‌ “वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स जारी हो गया। इस बार भारत 180 देशों की सूची में 161 वें स्थान पर पहुंच गया। 2022 के सूचकांक में हम 150 वें स्थान पर थे। यानी भारत 11 अंक नीचे गिरा है। भारत से हमेशा नीचे रहने वाला पाकिस्तान भी इस बार ऊपर हो गया। उसे 150 वें स्थान पर रखा गया है। म्यांमार में प्रेस फ़्रीडम नाम की कोई चीज़ नहीं बची है, इसलिए वह काफ़ी नीचे, 173 वें स्थान पर है। सबसे नीचे नार्थ कोरिया है। बाक़ी, हमारे तमाम पड़ोसी भूटान, श्रीलंका, नेपाल और यहां तक कि अफ़ग़ानिस्तान भी भारत से ऊपर हैं। हाय राम! विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर ये क्या से क्या हो गया!”

वे आगे लिखते हैं, “प्रेस फ़्रीडम के मामले में दुनिया के 180 देशों के सूचकांक में भारत 150 वें स्थान पर है और इधर हम हैं कि किसी विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के नाम पर एक-दूसरे को दीवाली-ईद की तरह बधाई दिये जा रहे हैं। प्रेस फ़्रीडम के मामले में भारत की स्थिति नाज़ुक बनी हुई है। पिछले आठ-नौ सालों का प्रेस फ़्रीडम वर्ल्ड इंडेक्स देखिये। भारत का स्थान लगातार गिर रहा है, पर प्रेस और शासन को ज़्यादा फ़िक्र नहीं! दोनों बधाई का आदान-प्रदान कर रहे हैं।”

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस संबंध में  टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘हम सभी के लिए शर्म से सिर झुकने का समय है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में 161 वें स्थान पर पहुंच गया है।”

आपको बता दें कि हाल ही में मीडिया वन चैनल के लाइसेंस रिन्यूअल मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “एक मज़बूत लोकतांत्रिक गणराज्य के कामकाज के लिए एक आज़ाद प्रेस चाहिए। लोकतांत्रिक समाज में प्रेस की भूमिका अहम है। राज्य काम कैसा कर रहा है, प्रेस इस पर रोशनी डालती है। प्रेस का कर्तव्य है कि वह सच बोले और नागरिकों के सामने कठोर तथ्यों को रखे ताकि लोकतंत्र सही दिशा में चले। प्रेस की आज़ादी पर अगर प्रतिबंध लग जाए, तो नागरिक एक ही तरह से सोचने लगेंगे और अगर समाज सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तौर पर एक ही तरह की विचारधारा रखने लगे, तो इससे लोकतंत्र को गंभीर ख़तरे पैदा होंगे।”

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